वही अपनापन .....
मेरी शक्ल का मुझको, आदमी नही मिलता
इस जहां में अब वो ,अजनबी नही मिलता
नहीं था मुकद्दर में शामिल ,लकीरों में दर्ज
है उसी की तलाश ,जो कभी नही मिलता
है अगर जिद तो उठा लो तुम भी परचम
जेहाद के हर रास्ते सब ,सही नही मिलता
एक तेरे होने का दिल को जो था सुकून
अपनापन तुझसे अब ,वही नही मिलता
सुशील यादव न्यू आदर्श नगर दुर्ग ,
३१७१२
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