Sunday, 18 August 2013

अजीब दास्ताँ है ये .....


कहाँ से शुरू कहाँ खत्म ....?
हमटपोरियोंके लिए ही ,संत कबीर ने शायद भविष्यवाणी करते हुए कहा था ,
पानी केरा बुदबुदा ,अस माणूस की जात
देखत ही छिप जाएगा ,ज्यों तारा परभात

हम लोग बरसाती  बुलबुले हैं|सुबह सूरज निकलने तक टिमटिमाने वाले तारे हैं |
हमारी कुछ दिनों तक अच्छी धाक रहती है |
पकड़ बनाए रखते हैं, मगर पंगा लेने की बीमारी के चलते कहीं कहीं से, एक दिन पंगु हो जाते हैं |
हमारे अस्तित्व का अस्त होना अवश्यंभावी होता है| कहीं प्रशाशन, कहीं पुलिस, कहीं हमारे ही किस्म के हमसे बड़े दादेपरदादे  आड़े जाते हैं |
हमारा वीकेट गिरना तय रहता है |हम क्रीज में तब तक ही टिक पाते हैं जब तकखुदाकी बालिग़ हमारे बेट के बीचोबीच आते रहती है |
हमारे, टांय- टांय फिस्स होने पर पब्लिक खुश होती है|मीडिया की नजर दिन भर हमारे चहरे से हटती नही |वो झूमझूम के हमारे रिकार्ड दिखाताबजाता है |
            हमारे पास .के.47 नही होता ,मगर रुतबे में हम देशी तमंचा में भी उतने ही असरदार होते हैं |
किडनेपिंग ,रेप , सुपारी-ब्रांड मर्डर ,बलवा,हप्ता वसूली  सभी जगह फिट हो जाते हैं|ग्राहकों का संतोष हमारा एक मात्र ध्येय रहता है |हमे आज नगदकल उधार का बोर्ड टाँगना नही पडता| बस नगद ही नगद का धंधा रहता है |
हम मर्जी के मालिक होते हैं |हमारा निर्णय तात्कालिक होता है |भीड़ में ,मेले में गए  तो पाकिट मार ली |अकेली औरत को देखा तो चेन खिंच लिया |लड़की देखी तो सीटी मार ली|
हम लोग रेकी मास्टर होते हैं ,जिस घर में चोरी करना होता है, वहाँ ठोकबजा लेते हैं ,कब कौन उठाता है  कौन बैठता है |दरवाजे किधर खुलते हैं कहाँ -बंद होते हैं |घर थाने से कितनी दूर है |
आजकल हमें साइंस के चलते नए-नए तिकडमो से जूझना होता है |लोग, टी एम के भरोसे, घर में नगद नही रखते , अब चुरायें भी तो क्या ख़ाक ?
 इलेक्ट्रिक बेलसी सी टी व्ही कैमरा ,मोबाइल  फोन हमारे नए-नए हाई-टेक दुश्मन पैदा हो गए हैं |
सब चलता है की तर्ज पर हम सब चलाए जा रहे हैं |आगे देखे....?  
    हम कहे देते हैं,लोग हम चोर ,उच्चको,उठाईगिरी वालों और मास्टर माइंड टपोरियों को, साइंस के दबाव के चलते , पब्लिक ,मीडिया और नेताओं की अति के चलते, देखने को तरस जायेंगे |
हमाराकौमखतरे में है ,हम अस्त होने के कगार पर हैं |
हमसे मिल कर काम करने वाले सभी मुहकमो के रेट हाई हो गए हैं |
नेता हमें घास नहीं डालते ,वे पालतू तभी तक बनाए रखते हैं जब तक काम निकल नहीं जाता|
पुलसिया मुखबिर हमारे खिलाप, हमारे पुलिस भाइयों को भडकाए रहते हैं ,देखो वो  इतना बनाया आपके हिस्से क्या आया ?
हम इस विश्वास परआक्सीजन-मास्क’  अपनी नाक पर धरे बैठे हैं कि , हमारा नयाआकाइलेक्शन बाद शायद पैदा हो ?
 अभी तो  हमें बचाने वालाडानकहीं  दुबक गया है |

सुशील यादव
वडोदरा
09426764552




























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