कहाँ से
शुरू कहाँ खत्म
....?
हम ‘टपोरियों’ के लिए
ही
,संत
कबीर
ने
शायद
भविष्यवाणी करते हुए
कहा
था
,
“पानी
केरा
बुदबुदा ,अस माणूस
की
जात
देखत
ही
छिप
जाएगा
,ज्यों
तारा
परभात”
हम लोग
बरसाती बुलबुले हैं|सुबह
सूरज
निकलने तक टिमटिमाने वाले तारे
हैं
|
हमारी कुछ
दिनों
तक
अच्छी
धाक
रहती
है
|
पकड़
बनाए
रखते
हैं,
मगर
पंगा
लेने
की
बीमारी के चलते
कहीं
न
कहीं
से,
एक
दिन
पंगु
हो
जाते
हैं
|
हमारे
अस्तित्व का अस्त
होना
अवश्यंभावी होता है|
कहीं
प्रशाशन, कहीं पुलिस,
कहीं
हमारे
ही
किस्म
के
हमसे
बड़े
दादे
–परदादे आड़े
आ
जाते
हैं
|
हमारा
वीकेट
गिरना
तय
रहता
है
|हम
क्रीज
में
तब
तक
ही
टिक
पाते
हैं
जब
तक
‘खुदा’
की
बालिग़
हमारे
बेट
के
बीचोबीच आते रहती
है
|
हमारे,
टांय-
टांय
फिस्स
होने
पर
पब्लिक खुश होती
है|मीडिया की नजर
दिन
भर
हमारे
चहरे
से
हटती
नही
|वो
झूम
–झूम
के
हमारे
रिकार्ड दिखाता –बजाता
है
|
हमारे
पास
ए.के.47
नही
होता
,मगर
रुतबे
में
हम
देशी
तमंचा
में
भी
उतने
ही
असरदार होते हैं
|
किडनेपिंग ,रेप , सुपारी-ब्रांड मर्डर
,बलवा,हप्ता
वसूली सभी जगह
फिट
हो
जाते
हैं|ग्राहकों का संतोष
हमारा
एक
मात्र
ध्येय
रहता
है
|हमे
आज
नगद
–कल
उधार
का
बोर्ड
टाँगना नही पडता|
बस
नगद
ही
नगद
का
धंधा
रहता
है
|
हम
मर्जी
के
मालिक
होते
हैं
|हमारा
निर्णय तात्कालिक होता
है
|भीड़
में
,मेले
में
गए तो पाकिट
मार
ली
|अकेली
औरत
को
देखा
तो
चेन
खिंच
लिया
|लड़की
देखी
तो
सीटी
मार
ली|
हम
लोग
रेकी
मास्टर होते हैं
,जिस
घर
में
चोरी
करना
होता
है,
वहाँ
ठोक–बजा
लेते
हैं
,कब
कौन
उठाता
है कौन बैठता
है
|दरवाजे किधर खुलते
हैं
कहाँ
-बंद
होते
हैं
|घर
थाने
से
कितनी
दूर
है
|
आजकल
हमें
साइंस
के
चलते
नए-नए
तिकडमो से जूझना
होता
है
|लोग,
ए
टी
एम
के
भरोसे,
घर
में
नगद
नही
रखते
, अब
चुरायें भी तो
क्या
ख़ाक
?
इलेक्ट्रिक बेल–सी
सी
टी
व्ही
कैमरा
,मोबाइल फोन
हमारे
नए-नए
हाई-टेक
दुश्मन पैदा हो
गए
हैं
|
सब
चलता
है
की
तर्ज
पर
हम
सब
चलाए
जा
रहे
हैं
|आगे
देखे....?
हम कहे
देते
हैं,लोग
हम
चोर
,उच्चको,उठाईगिरी वालों
और
मास्टर माइंड टपोरियों को, साइंस
के
दबाव
के
चलते
, पब्लिक ,मीडिया और
नेताओं की अति
के
चलते,
देखने
को
तरस
जायेंगे |
हमारा
‘कौम’
खतरे
में
है
,हम
अस्त
होने
के
कगार
पर
हैं
|
हमसे
मिल
कर
काम
करने
वाले
सभी
मुहकमो के रेट
हाई
हो
गए
हैं
|
नेता
हमें
घास
नहीं
डालते
,वे
पालतू
तभी
तक
बनाए
रखते
हैं
जब
तक
काम
निकल
नहीं
जाता|
पुलसिया मुखबिर हमारे
खिलाप,
हमारे
पुलिस
भाइयों को भडकाए
रहते
हैं
,देखो
वो इतना बनाया
आपके
हिस्से क्या आया
?
हम
इस
विश्वास पर ‘आक्सीजन-मास्क’ अपनी नाक
पर
धरे
बैठे
हैं
कि
, हमारा
नया
‘आका’
इलेक्शन बाद शायद
पैदा
हो
?
अभी तो हमें बचाने
वाला
‘डान’
कहीं दुबक गया
है
|
सुशील
यादव
वडोदरा
09426764552
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