21...
26.4.24
बहर-ए-ज़मज़मा
मुतदारिक मुसद्दस मुज़ाफ़
फ़ेलुन
फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ेलुन
22 22 22
22 22 22
भूल
गये तुमको, यूँ
बातों ही बात में हम
तनहा
भीगे बस यादों की बरसात में हम
#
क्या
जानो, सहना
पड़ता जुल्म सितम जब भी
फिर छोटी कुटिया,फिर वो ही औकात में हम
#
जिस हाल में हम रहते ,सहने की क्षमता टूटी
क्षीण हुए हैं भीतर ,सदमो की हालात में हम
#
एक
कहर बनी है , आज सजा सौ-सालो सी
जो
राह कैद उमर दे शामिल उस जमात में हम
#
बचपन नावें, कागज़ की क्या तैरा करती
भीतर बहते रहते कोरे जज्बात में हम
#
जो
दरख्त हमको फूलता -फलता सा दिखता
काट-गिराने
को रहते अक्सर घात में हम
#
22....
मुतदारिक मुसद्दस सालिम
फ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ाइलुन
2122 122 12
आप जब लापता हो गए
होश ही फाख्ता हो गए
वो निगाहों से बच तो गए
खुद नजर बे पता हो गए
कत्ल करके बरी भी हुआ
खुद सजायाप्ता हो गए
चल रहा आपका हर निजाम
सोए बस अब हप्ता हो गए
याद है बात का भूलना
उम्र भर सेहरा
खो गए
रास्ता
लोग सब पूछते
खुद ही
हम बेपता हो गए
23...
मुतदारिक मुसम्मन सालिम
फ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ाइलुन
212212212212
नींद में ख्वाब में वो समाया रहा बरसों
अजनबी ख्वाब सा दिल में छाया रहा बरसों
लोग
अब घर सजावट में क्या क्या नहीं
करते
वो दबी सी जुबा घर सजाया रहा बरसों
खामुशी का सबब था कहाँ मुख़्तसर इतना
मर्ज सा बस समझ मै छुपाया रहा बरसों
लिख के रखता किसी नाम को हर घड़ी माथे
दाग
दामन लगा वो मिटाया रहा बरसों
देख उनको
शजर सब्ज चन्दन गुमा होता
खुश्बुओ
शख्स बस इक नहाया रहा बरसों
जिनको दहलीज पे दी न कोई जगह लेकिन
यूँ ही ताबीज सा बस लगाया रहा बरसों
मोड़ वो जिस जगह जंग थी आपसी शिकवे
मोड़ फिर वो नफरतों मिलाया रहा
बरसों
हो किसी और के साथ ना हादसा यों भी
नाम उसके लिखा ख़त छिपाया रहा बरसों
थी तमन्ना हमें
खोल के जी हसें अक्सर
हम वहीँ रो लिए जो हसाया रहा बरसों
अब नही ढूढ़ते बेसबब हम कहीं चाहत
कुछ तड़फ को तहे दिल लगाया रहा बरसों
सुशील यादव
16.3.24
मुज्तस मुसम्मन
मख़बून
मुफ़ाइलुन फ़इलातुन मुफ़ाइलुन फ़इलातुन
१२१२ ११२२ १२१२ ११२२
मैं
उसके बाद नहीं,उसके
पेश्तर भी नहीं था
मेरे
मिजाज में तल्ख कोई तेवर भी नहीं था
#
मेरे
वजूद को ठोकर मारते लोग अक्सर
मेरे
वजूद में नौलखा जेवर भी नहीं था
#
बन
के खुशबू तुम रहती थी मेरे आसपास
कई
दिनों से हासिल ये मंजर भी नहीं था
#
तेरे
कत्ल का इल्जाम जाने क्यों है मुझ पर
घर
से मेरे बरामद कोई ख़ंजर भी नहीं था
#
चस्पा
रहे लोग कई तारीफ़ो के इश्तिहार
ये
हुनर कभी मुझमे , इस
कदर भी नहीं था
#
25....
बात आम बे-वजह ना पर्वत नुमा हो जाए
रिश्तो का पुल जर्जर अपने दर्मिया हो जाए
%
आदत मेरी जरूरतों से बोलता हूँ कम
सोचता हूँ मेरी सोच ना बेजुबा हो जाए
%
जिन्दगी ले भारी बोझ जीते थक गया हूँ
डर है कहीं
उम्र को ना ये गुमा हो जाए
%
इस बहार के मौसम
उड़ती- फिरती याद
सोचता हूँ पास की तितलियाँ हो जाए
%
लगभग अपनी शकल अब हो गई है बुरी काश
नीयत की तरह साफ आइना हो जाए
%
26.....
तवील
मुसम्मन सालिम :मुफ़ाईलुन फ़ऊलुन मुफ़ाईलुन
1222
122 1222
अगरचे
वो यहाँ बेसदा नहीं है
कोई
आवाज क्यों गूंजता नहीं है
%
तिरी आवाज से खौफ पैदा हो
मगर
तू बोलता साफ सा नही है
%
सुना
तुमने वो पाला बदल लेंगे
कभी
मेरी तरफ मन बना नहीं है
%
उसी
पर तुम निशाना लगाते हो
बता
दूँ साफ वो बेवफा नहीं है
%
खबर
है कोई उस कामयाबी की
निचोड़े
मन ,फला - फूलता नहीं है
%
सिहर
जाता हूँ मै खौफ के मारे
तेरा
ये खून क्यों खौलता नहीं है
%
हमे
जाना वहीं पर मुसाफिर बन
तू
जाने की जहां सोचता नहीं है
%
सुशील
यादव
19.3.24/17.3.२४.
27....
रमल मुसद्दस सालिम
फ़ाएलातुन फ़ाएलातुन फ़ाएलातुन 2122 2122 2122
करवटों
का सिलसिला कब तक चलेगा
ये थका
सा काफिला कब तक चलेगा
कौन जाने लापता मंजिल कहाँ पे
और उखड़ा रास्ता कब तक चलेगा
फिर अंधेरो से लड़ो ये मन बना लो
जिन्दगी
में उस्तरा कब तक
चलेगा
कोई तो तुम रौशनी के ख्वाब देखो
या खुदा ये बद्दुआ कब तक चलेगा
छोड़
दो अब तो हिदायत रात जीना
बारहा
कोई मशवरा कब तक चलेगा
थक गई है जिस्म की ताकत लचीली
बस कयासों चेहरा कब तक चलेगा
इंतखाबों
आ खड़ा हो मौत का
पल
एक
तरफा फैसला कब तक चलेगा
रहनुमाओ खौफ मत पैदा करो अब
पुश्तो जारी मामला कब तक चलेगा
सामने
मीजान मेरे इश्क का कर
जुल्म का ये फैसला कब तक चलेगा
सुशील
यादव
19.3.24
28...
motdarik saalim musamman
फ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ाइलुन
212 212 212 212 212 212
खून तुम घूट पीते जहर का नहीं
जायका जानते
क्यों
भटकते भला शहर में जो कि मेरा पता जानते
कुछ मुखौटे मसखरा लगे अब उतरने लगे जानिए
कौन
फतवा दिलों की समझ कौन फिर
मशवरा जानते
फूल
होती महक , हर बगीचा कहीं खुशनुमा भी लगे
रहनुमा
हो पतंग तुम अगर तितलियां पालना जानते
कौन ये रात दिन फूकता आशना हो बिगुल आज भी
चोट जो खाए होते सही साफ सुर साधना जानते
ता-कयामत
तुझे याद करना वजन जो लगे सच कहूँ
धोते
हम हर जगह पाप अपने चुनाचे खता जानते
29...
हज़ज मुसद्दस सालिम :मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन
मुफ़ाईलुन
1222 1222 1222
धुँआ सा क्या हुआ शहरों हवा नहीं है
मै जो बीमार हूँ मेरी दवा नहीं है
तलाशी तो अभी उसकी हुई जारी
हैं जिनके पांव छाले जो थका नहीं है
कहाँ तक लादे हम ये बोझ चल पायें
अरे माँ बाप बन के श्रवन पुजा नहीं है
बताये वाकया
उस शख्श का सबको
वही हरदम
अडिग रह कर झुका नहीं है
तुम्हे परचम उठाना मान कर देखो
तुम्हारे हाथ काँपे ये हुआ नहीं है
रुठी
लडकी तुझे हक़ से मना लेगे
अभी इतना बता हमसे गिला नहीं है
अभी दहशत लिए फिरता रहा हूँ मैं
मुझे कोई हादसा आकर छुआ नहीं है
मिटी लहरों
से रेतो की इबारत फिर
लिखा जो नाम
सीने से मिटा नहीं है
30...
फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ेलुन
2222222222222222
मन तापा हर पल यादों में छूकर देखो अंगारों को
बागों में है हरयाली
अंतस सूखती खेती है
हाथो से उम्र फिसलती
मुठ्ठी सांस की रेती है
दर्प की पास सुई रखी हो क्या उड़ाए गुब्बारों को
असमंजस में
हमने देखा
लोग भ्रमो को पाले हैं
वाजिब हाथो फूल था होना
उनमे ही छाले हैं
किस्मत लिखा
देखना हमको टूटे गिरते तारों को
लिख के कोई क्या समझे
भीतर बाहर की बातें
जो मन सौ चोर छिपाए
,
उनको सौ सौ सौगातें
दुःख की पाती
क्या भेजें संयम राजकुमारों को
पीटे ढोल धमाके ,
कितने उड़ते
रंग गुलाल
मन परहेजी मन
जाने ,
बैठा सभी
मलाल
अम्ल गिरे
बारिश में , बरसा देख अमन क्षारो को
सुशील यादव
२०.3.24
31...
unnamed
faa'ilaatun
faa'ilaatun faa'ilaatun fe'
2122 2122 2122 2
ये कबूतर पर
बिना पाले नहीं जाते
जर्द से खत तेरे सम्हाले नही जाते
@
देखना तुम
याद रखना काम की बाते
बंद टकसालो टके
ढाले नहीं जाते
@
जख्म भरने वक्त लगता ही नही जब तुम
प्यार से कह दो अजी
छाले नहीं जाते
@
भीड़ में अब आदमी पर क्या भरोसा हो
लाख चाहें लोग सम्हाले नहीं जाते
@
हम
निशाना क्या लगाए बोलना तुम ही
हाथ से
कुछ दूर तक भाले नहीं जाते
@
है नियम
ये सांवले लोगों बता देना
मैल हो
मन आदमी काले
नहीं जाते
@@
20.3.24
32..
Beher (बहर-ऐ रमल मुसमन
महज़ूफ़) (फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलुन) Taqti
(2122 2122 2122 212)
भीड़ में, कोई किसी को,रास्ता देता नहीं
एक तिनका, डूबते को, आसरा देता नहीं
ले कहाँ जायें कहो , उखड़ी सी साँसों को अभी
वो तसल्ली भर, मरीजों को हवा देता नहीं
चाहता हूँ
मै, हटा दूँ ,ये गुनाहों का नकाब
दूसरा हमको लगाने,
चे हरा देता नहीं
तुम पा लो
शाय,द ख़ुशी कोई भी, यहाँ पल भर कहीं
होठ पर
मुस्कान कोई, मस खरा देता नही
बात चारागर
बता, बीमार उसको, समझे क्यों
दाग दिल का
हर पुराना, मन हरा देता नहीं
दिन समय पीछे धुली, कुछ
याद की तस्वीर भी
अक्श भी कर साफ इतना, आइना देता नही
ठीक मिल उनसे जुदा हो , बीत बरसों भी गए
वो सुकून
अपना ठिकाना या पता देता नहीं
सुशील यादव
20.3.24
33...
Munsarah musamman matvii maksuuf
mufta'ilun faa'ilun mufta'ilun
faa'ilun
2112 212 2112
212
होठ सी मायूस चुप, जीता
रहा आदमी
दर्द भरे गम तमाम, पीता रहा आदमी
कौन
बदल लेता, हर बार कमीजें यहाँ
दाग लगा चेहरा वो, सीता रहा आदमी
गिर के उठा जंगलो, ख्वाब था देखा हुआ
खूब दहाड़े लगा, चीता रहा आदमी
काट लो तुम बे- सबब, बारहा उस शाख को
छाव दे उद्घाटनो, फीता रहा आदमी
साफ पढो तो ,समझ
आने लगेगा यही
साफ लिखी ये कहीं
गीता रहा आदमी
34...
मुक़तज़िब मुसम्मन मतवी
फ़ाइलात मुफ़तइलुन फ़ाइलात मुफ़तइलुन
2121 2112 2121 2112
एतराज के अभी, पत्थर लिए खड़े हैं लोग
आज ख़ास, सारथी की फिक्र में,
अड़े हैं लोग
मोड़ पर तुझे दे सकूँ, मै हिदायते
लौटने
कुछ नगीना, उम्र- घड़ी, जानकर जड़े हैं लोग
यूँ हमें, अँधेरे
में कुछ, देखने की बात कहाँ
जो गुजारते हैं, उजालो में दिन, बड़े
हैं लोग
जेल की सलाख, अभी जानता नही तू यहाँ
सींखचों तिहाड़ की, जादूगरी, सड़े हैं
लोग
चाहतो का खेल इधर, खेलना तुझे भा गया
फोड़ना नहीं कि यही,
कीमती घड़े हैं लोग
सुशील यादव दुर्ग 22.3.24
35....
बहर-ए-हिन्दी मुतकारिब मुसद्दस मुज़ाफ़
फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ेलुन फ़े
22 22 22 22 22 2
धूप में निकले हो साए की फिकर रखना
मोम सा मन जो पिघले मन पे नजर रखना
$
मंजिल जानिब दो चार कदम चल देखो
फिर पलट कहीं पर मील का पत्थर रखना
$
लोगों के हाथ में है एतराज के पत्थर
क्यों
नुमाइश में शीशे का घर रखना
$
मन भीतर हो तेरे यकीन उजाला फिर
दीपक
उम्मीदों क्या इधर- उधर रखना
$
छोड़ के जिस मोड़ पर, हमे गए हो तनहा
लौटे
वक्त बस, उस मोड़ की खबर रखना
$
36...
बहर-ए-हिन्दी मुतकारिब इसरम मक़बूज़ महज़ूफ़
फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ेलुन
22 22 22 22 22 २
उन दिनों शहर
अजीब हुआ करता था
दिल के मगर ये
करीब हुआ करता था
जब तुझे छू के आ जाती हवा कहीं से
वीरान इलाको नसीब हुआ करता था
परछाई मेरी छीन कर बिछुड़ने वाले
एक
तमस वजूद रकीब हुआ करता था
मेरे
माँगने से क्या तुझको वो देता मुझको
मेरा खुदा मुझसा गरीब हुआ करता था
37....
23.3.24
unnamed
faa'ilaatun mufaa'ilun mufaa'ilun
२१२२ १२१२
१२१२
कद से बढ़ता तमाम
साया इन दिनों
तेरी जानिब
कदम बढाया इन दिनों
मेरी नीयत
कदम कदम सुई रखी
खूब दहशत मुझे
डराया इन दिनों
हम जहर पीने आदमी मना करें
हर शराबी है
तिलमिलाया इन दिनों
सिर्फ
चारागरी के दम रखा उसे
खुश नहीं जो
दवा पिलाया इन दिनों
जब नसीबो
में जुर्म की हो जर्द पात
सब्ज पेड़ों गजब हिलाया इन दिनों
38...
21
12 2121
2112
बेबसी के
सिर्फ सांप पलते रहे
दूध के बर्तन जहर उबलते रहे
@
छोड़ बुलंदी को उतर
आसमा से
गाहे ब गाहे सनम
उछलते रहे
@
नीद से अक्सर हमे
जगा दिया है
ख्वाब सभी रौशनी
निगलते रहे
@
दौड़ जहाँ आदमी ना जीत सका
सब्र से देखा वहीँ
टहलते रहे
@
फिक्र करो आप अपनी करनी सभी
खामियों
से खुद को कब बदलते रहे
@@
23.3.24
39...
221 1222
221 1222
देखा है रुदन, होंठों- मुस्कान न पाए हम
थे राह महल-पत्थर, अरमान न पाए हम
#
नाजुक मिली इक लड़की चेहरा था शिकन वाला
क्या उसने कहा रुक हमसे जान न पाए हम
#
पर को जो कतर बैठे परवाज नहीं देखे
क्या उनको बताये पोथी पढ़ ज्ञान न पाए हम
#
थी पूछ परख में अपनी कोई जरा खामी
जाते हुए महमानों महमान न पाए हम
#
आधार हमारे बचपन के थे कहाँ वैसे
हासिल हमें जो होना था सम्मान न
पाये हम
##
24.3.24
40A…
221 1222 221 1222
मिन्नत है खुदा
अँधियारे साया सुझाई दे
निकले जो
जुबानी तेरा नाम सुनाई दे
$
खुशबू बना
उड़ता रहता हूँ मै तेरे पास
हो इतनी इनायत हर अंदाज दिखाई दे
$
ना कर-वटे बदलू
हंसी ख्वाब ना देखूं मै
तब
नींद से उठते तेरी याद
कलाई दे
$
रिश्तो की अदालत ये बेजान हलफनामे
या तो मुझे जिन्दा रख या मेरी रिहाई दे
$
हकदार
रियायत काबिज बैठ गया होगा
लफ्जों ये
हकीकत शायद ठीक दिखाई दे
$
40B…
२२ २२ २२ २२ २२ २२
मिन्नत है खुदा से अँधेरे में परछाई दे
बेख्याली जो निकले तेरा नाम सुनाई दे
करवट ना बदलू
हंसी ख्वाब ना देखूं मै
नींद से उठ जाऊं तेरी याद जुम्हाई दे
कसमो का कसीदा है
ना बातों का ताना
ख्याले बुनता जाऊं बस इतनी तन्हाई दे
24.3.24
41...
तेरी सियासत अम्नो इमान दे
जाता
एक टुकड़ा ताकने आसमान दे जाता
#
पत्थर की नई इमारत हासिल तुझ को
हमको फूस माटी बना , मकान दे जाता
#
ये कसीदों के फूल अचानक मुरझा
रहे हैं
वक्त रहते ,कोई मीठी
जुबान दे जाता
#
हवा ठहरी, रुका कारवां, गुमी है मंजिल
कोई जादुवी हौसला मुझको उफान दे जाता
#
कोई तो देखे सियासी अदालत जानिब
जनता को गुम उसकी पहचान दे जाता
#
दबे पांव न दे मौत , कोई जिन्दगी दस्तक
चार जीने का पल ही मुस्कान दे जाता
#
नीद आती भी कहाँ फसल काटने के दिन
उम्मीद का गणित ही थकान दे
जाता
##
25.3.24. होली
42...
Mutdaarik musamman saalim
faa'ilun faa'ilun faa'ilun faa'ilun
212 212 212 212
तेरी याद ......
@
मै परेशानी वाकई सबब रखता हूं
तेरी यादों को रोशन गजब रखता हूं
@
सिर्फ शामिल मेरे
ख्याल में तू अभी
तुझ से होके जुदा खुद को कब रखता हूँ
@
मै नहीं जाता मंदिर शिवालय
कभी
बस हिफाजत छिपा अपना रब रखता
हूं
#
बस पता जान मैंने
तुझे खत लिखा
खत को लिखने पुराना सा ढब रखता हूं
#
तुझ को पाने की चाहत भी नाकाम
थी
तुम गिनो यूँ गणित मै
खरब रखता हूँ
#
सुशील यादव
न्यू आदर्श नगर,जोन 1 स्ट्रीट
3 A
दुर्ग छत्तीसगढ़
मोबाईल :9408807420
43…
क़रेब मुसद्दस मक़फ़ोफ़
मुफ़ाईलु मुफ़ाईलु फ़ाएलातुन
1221 1221 2122
अजनबी
का क्यों तनाव रखिये
अभी जिंदगी
से बस लगाव रखिए
@@
नदी रोकने से
पेश्तर कहीं अब
समझ
मेँ कहीं अपना बहाव रखिए
@@
झुकी आँख समझ आ
गई हमारी
चलो आप हरा दिल
के घाव रखिए
@@
अगर बंधने से
प्यार प्यार होता
उसी कुनबे तरफ अब झुकाव रखिये
@@
वजन एक ही तरफा झुका रहा वो
वहीँ आप अभी बाट पाव रखिए
@@
नहीं दाँव में
दम पर करो सियासत
इजाजत जो मिले
तेज ताव रखिए
@@
बड़ी सर्द लहर आदमी कँपा
दे
जला के
सुविधा बस अलाव रखिए
@@
44... Ramal musamman maKHbuun mahzuuf maqtuu.a
faa'ilaatun fa'ilaatun fa'ilaatun fe'lun 2122 1122 1122
22
दर्द का दर्द से जब, रिश्ता बना लेता हूं
इस बहाने सभी को, अपना बना लेता हूं
@
ख़ास कुछ लोग मुकर जाते, बातों से अपनी
आदमी जान, अलग रस्ता बना लेता हूं
@
मज़हबी दौड़
जहाँ ,मुल्क करे क्या हासिल
खौफ की सोच, धमाका सा बना लेता हूं
@
धूप में ढूढ़
रहा, साया किसी बरगद का
छाँव तारीफ पसंदीदा बना लेता हूं
@
रंज फूलों से मुझे, खुशबू का हूँ परहेजी
बारहा याद का, बागीचा बना लेता हूँ
@
क्या बहलता ही
नहीं आपे जमाना बाहर
देर कुछ सोच के, घारोबा बना लेता हूँ
@
लूँ पहन बीच
में आजादी का खादी कुरता
इस हकीकत के
लिए, चरखा बना लेता हूँ
@@
देखे जब जाते नहीं कुछ दुविधा के मंजर
औऱ नीयत का नया चस्मा बना लेता हूँ
@@ 26.3.24
45...
Ramal musaddas maKHbuun
faa'ilaatun fa'ilaatun fa'ilaatun
2122
1122 1122
बात में हंसी बिछौना लगा भाई
सहमे सहमे ही निशाना लगा भाई
@
पूछता कौन है बीमार
तबीयत
कुछ बता देना बहाना लगा भाई
@
आजकल भूले भरोसे के सभी दिन
कामयाबी छू के
चूना लगा भाई
@
जिद से चल पाती नहीं
कोई की दुनिया
ख़ास मंजिल पे जा नौका लगा भाई
@
जो मचाये जा रही राह में हलचल
बात को छोड़ बहस-छौका लगा भाई
@
कोई
दीवार बता होय मिरे कद
बस वो दीवार मुझे ज़िंदा लगा भाई
सुशील यादव
28.3.24
46...
22 22 22 22 22 22 2
नाव को फेक, पाँव में जो, भंवर बांध लेते है
नादान लोग, जीने अजब ,हुनर
बाँध लेते हैं
#
क़ब पड़ा फर्क, जमाने को,
मेरे होने का इन दिनों
सूखी शाखों बदले, सब्ज शजर बांध लेते है
#
बचपन ढूंढ रहा हो, गलियों में जब निवालो को
खौफ जदा हम भी,
आजकल, शहर बाँध लेते हैं
#
लोग चुप थे ,, हादसा छूकर निकला नही, बस उनको
एहतियात के तौर , गठरी वे ,पत्थर
बाँध लेते हैं
#
कोई
तो, माहिर बैद- बैगा- गुनिया बुला लाओ
कहते, उड़ती हवा ,उसूलो नजर बांध लेते है
सुशील यादव
27.3.24
47.....
22 22 22 22 22 22
भूले तुमको, बस यूँ ही बातों बात में हम
भीगे इतना तनहा बारिश,-बरसात में हम
#
बे मौसम सहना पड़ता
दुनिया भर के ताने
फिर छोटी कुटिया,फिर वो ही औकात में हम
#
जिस हाल तुमने रखा , सहने की क्षमता टूटी
क्षीण हुए भीतर ज्यादा सदमो की हालात
में हम
#
एक कहर सी लगती, आज सजा सौ-सालो की
अपनेपन का दंश कुचले हुए आघात में हम
#
सब्ज दरख़्त हमें , सुख कितना देता लेकिन
काट-गिराने सोच रख अक्सर होते घात में हम
#
बचपन नावें, कागज़ की जब तैरा करती
उस पर बहते ,उम्मीदों की जज्बात में हम
#
सुशील यादव
48...
Ramal musamman saalim
faa'ilaatun faa'ilaatun faa'ilaatun
faa'ilaatun
2122
2122 2122 2122
आह पर तुम, सादगी तम्बूरा, ले के क्या करोगे
हर किसी के आगे, अपना रोना ले के क्या करोगे
@
पैर जंजीरें,
किसे वाजिब लगा , कुछ सोचना भी
ढोल-ढपली, हाथ में मंजीरा , ले के क्या करोगे
@
तुम सितम माने, बता देते ,कहाँ था लापता वो
फैसलों में
,आदमी फिर, हीरा ले के क्या करोगे
@
आप जब तस्वीर,
आ के खींच जाते , क्या बताएं
सूर-मीरा, संत सा रघबीरा, ले के
क्या करोगे
@
वो किताबी
लोग थे, इतिहास के माहिर पुरोधा
खास उनसा,
आखिरी सा –रुतबा, ले के क्या करोगे
@
ऊँट तक तो, तुमको भिजवानी, 'सुशी जी' बात अपनी
मुठ्ठियों कह लेने , बोलो जीरा ,ले के क्या करोगे
@@
सुशील यादव
27.3.24
49....
Ramal
musaddas mahzuuf
faa'ilaatun
faa'ilaatun faa'ilun
2122
2122 212
तुम नजर भर ये, अजीयत देखना
हो सके, मैली-सियासत देखना
#
इस भरोसे , राजनीती ख़ाक सी
लूट शामिल की, हिमाकत देखना
#
दिन कमाई के , जमाना आप का
कब हो मुमकिन
फिर, जिहानत देखना
#
लोग रहते , थे डरे जब आप से
जानते ना थे , अदालत देखना
#
तोहफे में ‘लाख’, तुमको बाँट दे
कौम की तुम ही, तबीयत देखना
#
अजीयत =यातना ,जहानत = समझदारी
सुशील यादव
50….
behr-e-hindi
Mutqaarib musaddas mahzuuf
fe'lun fe'lun fe'lun fe'lun fe'lun fe'lun
२२ २२ २२ २२ २२ २२
अँधेरे में यादों की परछाई रखता है
एक वही तो बस
दूर की बीनाई रखता है
#
जिसके हाथ खुले पर पैरो में ज़ंजीरें
वह बातें
तनहा जग
हंसाई रखता है
#
दिखता फटेहाल उसने सीखा यहीं सलीका
अब नादान
जेब अच्छी सिलाई रखता है
#
हमको बखिया उधेड़ने की धुन रहती है
वही यक़ीनन वाजिब तुरपाई रखता है
#
हम तो ढूँढ़ रहे, टूटे रिश्तों के वजूद
मन ये कबाड़ बुनी चारपाई रखता है
#
सब ने देखा
उसको, दूर शहर से आते
कहने
सरमाया फ़कत चटाई रखता है
#
सुशील यादव
न्यू आदर्श नगर
जोन 1 स्ट्रीट 3 दुर्ग छत्तीसगढ़
51…..
Muzare.a musamman aKHrab
maf'uul faa'ilaatun maf'uul faa'ilaatun
221
2122 221 2122
चोरी के सिक्को में, चाँदी की खनक नहीं है
इस राज क्या
हवाले, हमको भनक नहीं है
@
ले जाती जिंदगी ,अपनी रूह को अकेले
गिनती के चार दिन, हैं अँधेरे ,चमक नहीं है
@
रोकी अगर है राहें, ठहरा सा कारवां है
मंजिल नजर
न आती, राही सजग नहीं है
@
इन खिड़कियों के परदे ,दरवाजों की नक्काशी
बेजान सब लगे जो, तेरी वरक़ नहीं है
@
मौसम नहीं किताबों में, फूल कुछ दबाते
बीते
हुए जमाने, यादों महक नहीं है
@
अपनी कमी, कहाँ तक आखे, चुरा सका मै
आखों गई हया, दिल में कम- झिझक नहीं है
@
मयखाने में
भुला बैठा, सब
नसीहतों को
उस आदमी, दुवाओं कोई
शतक नहीं है
@
रिश्तो को खून की
परखा , तब समझ में आया
आपस लगाव उपरी, दिल में नमक नहीं है
@
सुशील यादव
न्यू आदर्श नगर,जोन 1 स्ट्रीट
3 A
दुर्ग छत्तीसगढ़
मोबाईल :7000226712
52.....
रज्ज़ मुसम्मन मतवी मख़बोन
मुफ़तइलुन मुफ़ाइलुन मुफ़तइलुन मुफ़ाइलुन
2112 1212
2112 1212
29.3.24
लूट लिया है तुमने फिर, देश को अपनी चालों से
धोखे हमे मिले
हैं, मक्कार बने दलालों से
$
खौफ जदा रहे मगर, मुर्दे गड़े उखाड़े कब
खूब प्रहार झेलते, लिपटे रहे कँकालो से
$
आज तो कायनात
में, जोर लगा के रहता तू
सीख नहीं सका कभी, पांव तलों के छालों से
$
हमने भी खाई
कसमे, छोड़ेंगे उसे कभी नहीं
रंग जमा के रखने वाला ही, है डरा गुलालो से
$
पांव बंधे
जहाँ वहीं हथकड़ी भी लगा रखो
देश निकाला करने वालो ये भी सुनते सालों से
$
मन को बड़ी
यहाँ हिदायत, सुविधा नहीं जरा
तोड़ कहाँ
निकाल पाते, दुविधा के तालों से
$
सुशील यादव
न्यू आदर्श नगर दुर्ग (छ.ग.)
susyadav7@gmail.com 7000226712
53....
Mushaakil
musaddas saalim aa'ilaatun mufaa'iilun mufaa'iilun
2122 1222
1222
ये खुदा किश्तों में तक़दीर लिखता है
बाद मुद्दत उसे जागीर लिखता है
#
चाहे कोई
गरम कुछ कोई ठंडा यूं
मांग के
मान वो तासीर लिखता है
#
साथ चल भाँप लेते हैं हवा का रुख
नाम पर
वक़्त जब कश्मीर लिखता है
#
हो जिसे बस अँधेरा खौफ जीवन भर
ये खुदा ही समझ तनवीर लिखता है
#
हम थे
आवेग से पाने जिसे आतुर
ये ज़माना हमे आधीर लिखता है
#
दर्द का कोना
– कोना नाप ले जीता
वो ख़लाओ तेरी तहरीर
लिखता है
#
वक्त से पहले
छेड़ेगा जमाना ये
ता-क़यामत
मिलो तदबीर लिखता है
#
सुशील यादव 29.3.24.
54….
बहर-ए-ज़मज़मा मुतदारिक मुसम्मन मुज़ाफ़
फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ेलुन
फ़ेलुन फ़ेलुन
22 22 22
22 22 22 22 22
दर्द जहाँ मैं टांगा करता, टूटी आज वो खूंटी
लगती
सारे संबल सभी आसरे,बिना असर की बूटी लगती
लेकर चलना उसी गली में,यादों का भरता हो मेला
बचपन खेल घरोंदे वाले,
नाव डुबाता रहूं अकेला
अब उम्र क़े इस पड़ाव में, कितनी बातें
छूटी लगती
##
अरमानों के
जब पँख नहीं थे, आकाश लगा करता छोटा
उड़ने की जब ताकत आई तब ,व्यवधानो ने रोका टोका
शेष बचा क्या कहने को अब नगीन बिना
अंगूठी लगती
##
इन बाजुओं का दम तो देखो ,पहले जैसा आज भी क़ायम
तुझसे मिलने
की चाहत में ,रत्ती भर उत्साह नहीं कम
अरमानों की दुनियां तुझ बिन खाली - खाली झूठी लगती
##
उमंग उजालों
सजती सजाती ,सदा रहे पहचान दिवाली
मुस्कान बांटते जाना यूँ,तमाशबीन बजा दे ताली
मंहगाई हर पीठ छोलती , लम्बी विपदा की सूटी लगती
##
सुशील यादव
न्यू आदर्श नगर दुर्ग (छ.ग.)
susyadav7@gmail.com 7000226712 /30.3.24.
55…
Munsarah musaddas matvii maksuuf
mufta'ilun faa'ilun mufta'ilun
2112 212
2112
अब यहाँ इस बात की सनसनी है
खूब अदावत
भी यहाँ
आ ठनी है
#
हमने तराशा उसे हीरा बना
आज चमक फिर वहीं दो गुनी है
#
आग बबूला है सरकार मिरे
नब्ज किसी बात दब के तनी है
#
जोर लगा देख लो आप तमाम
आमदनी आप लुटी रह-जनी है
आप के नाचीज को जागीर मिले
हर किरण उम्मीद डरी अन-मनी है
#
आप ने हर फैसला कमजोर लिखा
कातिलो की खैर अभी
अन - सुनी है
#
पल वो मिलाया था हमें बीच कहीं
रिश्तों की दीवार वहीं अध- बनी है
#
शेर जँगल ढेर
खुले घूम रहे
खुश्क बँधी योजना की शेरनी है
#
सुशील यादव
न्यू आदर्श नगर दुर्ग (छ.ग.)
susyadav7@gmail.com
7000226712
@
56…
Rajaz musaddas matvii
mufta'ilun mufta'ilun mufta'ilun
2112 2112 2112
मेरी जुबां जब भी फ़िसल जाती है
बात जरा तल्ख निकल जाती है
#
जज्ब निगाहों से भला फायदा क्या
चोट दिली गम में बदल जाती है
#
शौक से अफ़सोस करें जाहिर गम
खास नदामत ये निगल जाती है
#
उसको तराशा हमी ने जान लगा
हीरे सी सूरत
वो ही खल जाती है
#
लाख की चाहे
हो कमाई दौलत
नाम नजर खास उछल
जाती है
#
सुशील यादव
न्यू आदर्श नगर दुर्ग (छ.ग.)
susyadav7@gmail.com
7000226712
57...
Mut
qaarib musamman mahzuuf
fa'uulun fa'uulun fa'uulun fa'al122 122
122 12
हँसी
चेहरा से सामना हो गया
बिना कुछ कहे सब अता हो गया
#
हमारे उसूलों तलाशी करो
ये खोना भी अब,सिलसिला हो गया
#
हमी से गुलामी कराने लग़ा
यहाँ बादशा साथ का हो गया
#
मना लूँ तसल्ली से उसको अभी
कहीं दूर का फासला हो गया
#
कहीं मातमी धुन सुना तो लगा
शहादत नुमा हादसा हो गया
#
दबे पाँव चल के,गया था कहीं
शिकारी वही, लापता हो गया
#
नही जानता वो किसी प्यार को
वही अजनबी बारहा हो
गया
#
सुशील यादव न्यू आदर्श नगर दुर्ग (छ.ग.)susyadav7@gmail.com
000226712
1.4.24
58....
ख़फ़ीफ़ मुसद्दस मख़बून महज़ूफ़ मक़तू
फ़ाएलातुन मुफ़ाइलुन फ़ेलुन
2122 1212 22
तेरी दुनिया नई नई है क्या
रात रोके कभी, रुकी है क्या
#
तुम बदल लो ,मिजाज भी अपने
अब शराफत से, दुश्मनी है क्या
#
चीर
कर मै दिखा नहीं सकता
दिल बची कोई जिंदगी है क्या
#
जादु-टोना कभी-कभी चलता
सोच हर पल ,यों चौकती है क्या
#
तीरगी , तीर ही चला लेते
पास कहने को, रौशनी है क्या
#
सर्द मौसम, अभी-अभी गुजरा
बर्फ ज्यादा कहीं जमी है क्या
#
सुशील यादव
न्यू आदर्श नगर दुर्ग (छ.ग.)
susyadav7@gmail.com 7000226712/1.4.24
59...
रजज़ मुसद्दस मतवी
मुफ़तइलुन मुफ़तइलुन मुफ़तइलुन
2112 2112 2112
कौन है ना समझी सिखा देता है
बंद झरोखे से हवा देता है
#
राज था सुकरात जहर पीने का
कौन हिफाजत यूँ बढ़ा देता है
#
जलसे में खामोश रहा कौन वहाँ
हाथ में परचम जो थमा देता है
#
टाँगना मुझको है अगर दीवारों
पहले
जहाँ मिट्टी मिला देता है
#
शहर उसे जान नहीं पाया यहाँ
फक्त
गलत दोष लगा देता है
#
काँटे सभी सामने जो आन पड़े
जोर लगा राह हटा देता है
#
सुशील यादव
न्यू आदर्श नगर दुर्ग (छ.ग.)
susyadav7@gmail.com
7000226712
60...
२१२२ १२१२
२
अन-मने सूखे झाड़ से
दिन.
तुम सजा लो कबाड़ से दिन
#
है
पुरानी कमीज अपनी
सर्द काँपे है हाड़ से दिन
#
जाने कैसे तो काटेंगे हम
अब जुदा हो, पहाड़ से दिन
#
छाँव आती नही, जरा भी
हैं अजूबे, ये ताड़ से दिन
#
लूट गजनी की हो गई है
बस्ती भारी उजाड़ से दिन
#
सुशील यादव
न्यू आदर्श नगर दुर्ग (छ.ग.)
susyadav7@gmail.com
7000226712
3.4.24
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