221 2122 221 2122
वरना कहाँ -चलोगे ...?
हम बेवजह ,जहां में भटके गुमान लेकर
कोई जरूर आएगा नव-विहान लेकर
कुछ दाग आज भी बाकी है, जिसे मिटाने
बरसो लगे, पुराने- बीते, निशान लेकर
इतराये जो पड़ौसी उसको तमीज दे-दो
आदत सुधार लें वो अमिट पहचान लेकर
मजबूत हैं इरादे तो बात ही नहीं है
वरना कहाँ -चलोगे अपनी थकान लेकर
कोशिश करें सभी जन ,ऊंचा ललाट पाएं
गौरव पलों में झूमे सब , हिन्दुस्तान लेकर
सुशील यादव
१३.६.१८/ ३०.९.१८
वरना कहाँ -चलोगे ...?
हम बेवजह ,जहां में भटके गुमान लेकर
कोई जरूर आएगा नव-विहान लेकर
कुछ दाग आज भी बाकी है, जिसे मिटाने
बरसो लगे, पुराने- बीते, निशान लेकर
इतराये जो पड़ौसी उसको तमीज दे-दो
आदत सुधार लें वो अमिट पहचान लेकर
मजबूत हैं इरादे तो बात ही नहीं है
वरना कहाँ -चलोगे अपनी थकान लेकर
कोशिश करें सभी जन ,ऊंचा ललाट पाएं
गौरव पलों में झूमे सब , हिन्दुस्तान लेकर
सुशील यादव
१३.६.१८/ ३०.९.१८
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