तैं सुशील ....
अतलंग लेवत सरकार अडबड
नदिया चढ़े मानो धार अडबड
अर्जी देवैया यहु चिन्हारी
जगा-जगा कहे जोहार अड़बड़
का खा के उपजाए महतारी
तोर बाबू के गोहार अडबड
चीन्हे बर मोला,जुग लग जाही
चारो धाम हे चिन्हार अडबड
परिया परे कस 'जी' लागत असो
करम के जुच्छा कन्हार अडबड
मिरचा सही तोला सुरतावंव
मरत-ले झन्नाथे झार अड़बड़
तैं सुशील चिक्कन घड़ा के माफिक
मातम में मानस तिहार अडबड
सुशील यादव
फिलहाल ,वडोदरा गुजरात
अड़बड़ = बहुत ज्यादा
चिन्हारी=पहचान
जोहार= दुआ सलाम
गोहार =चीख चिल्लाना
जी = मन ,ह्रदय
परिया= फसल न उगाना
कन्हार=उपजाऊ जमीन
जुच्छा= खाली
मानस = मनाना
12. 9.18
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