दीप जले जब तूफानों में
किस -किस से तुम बातें करते ,किससे यारी पक्की हो गई
है निकट चुनाव तभी , गठबंधन तैयारी पक्की हो गई
छल कपट भरी दुनिया में, लेना- देना सब चलता है
तुमने सीखा लेना महज ,बगावत सारी पक्की हो गई
मुह देखी दुनिया में है, खेल निराले मायावी सारे
लो पीछे की हलचल में अब,धार तुम्हारी पक्की हो गई
राह पकड़ लोगे जिस दिन ,शांती-अहिंसा बापू जैसे फिर
मैं समझूँगा उस दिन केवल ,दुनियादारी पक्की हो गई
कच्ची सड़के , गाव् अन्धेरा,दीप जले जब तूफानो में
जिस दिन भूखा सोय न कोई,पहरेदारी पक्की हो गई
बोल थके हम चौराहों पर ,आदमकद अपना लगवा दो
मरने की सब राह देखते ,अपनी बारी पक्की हो गई
उन्मादों में घेरे रखता ,बाटे फिरता कुनबों -जातों में
वे पैदल के दिन लद गए, घुड़सवारी पक्की हो गई
सुशील यादव
७.११. १८
शुभ दीपावली
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किस -किस से तुम बातें करते ,किससे यारी पक्की हो गई
है निकट चुनाव तभी , गठबंधन तैयारी पक्की हो गई
छल कपट भरी दुनिया में, लेना- देना सब चलता है
तुमने सीखा लेना महज ,बगावत सारी पक्की हो गई
मुह देखी दुनिया में है, खेल निराले मायावी सारे
लो पीछे की हलचल में अब,धार तुम्हारी पक्की हो गई
राह पकड़ लोगे जिस दिन ,शांती-अहिंसा बापू जैसे फिर
मैं समझूँगा उस दिन केवल ,दुनियादारी पक्की हो गई
कच्ची सड़के , गाव् अन्धेरा,दीप जले जब तूफानो में
जिस दिन भूखा सोय न कोई,पहरेदारी पक्की हो गई
बोल थके हम चौराहों पर ,आदमकद अपना लगवा दो
मरने की सब राह देखते ,अपनी बारी पक्की हो गई
उन्मादों में घेरे रखता ,बाटे फिरता कुनबों -जातों में
वे पैदल के दिन लद गए, घुड़सवारी पक्की हो गई
सुशील यादव
७.११. १८
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