Thursday, 2 March 2017


नुन्छुर कस मोला लगय ,बात-चीत व्यवहार
कस बिताबो पांच बछर, असकट मे सरकार

लिख-लिख ले अरजी घुमन,काखर-काखर द्वार
कोनो कान कहां धरय ,सुनय हमार गोहार

बिहिनिया कुकरा बासत,भूकय  कुकुर हजार
रुई गोजाय कान कस,निभय तुहार -हमार

आम आदमी बस कहव, आमा चुहके दारि
फिर बाद बेहाल करव,मारे-मार तुतारि

सुख के संगवारी हमर ,काबर रहे लुकाय
जउन मिले मिल बांट के ,देवी भोग लगाय

सुशील यादव

चाउर बबा के नाती

दू रुपिया चाउर खवा ,बना ड़ारिन अलाल
छत्तीसगोंदा तुम करव ,छत्तीसगढ़  के लाल

खेत किसानी काम बर,कमइय्या कती लान
दारू व्यसन छोड़य सब ,इहों बिहार बनान

चाउर बबा के नाती ,दिखत तुंहर हे मात
ताजा जेवन परस दय ,बासी खात अघात

चाउर बबा के नाती ,अइसन पकड़ो कान
उधार कोनो झन करे ,कोंदा समझ दुकान

चाउर बबा के नाती,अइसन रख मर्याद
गुरहा चीला कस लगे,नुन्छुरहा के स्वाद


सुशील यादव

छतीसगढी शब्द चित्र
नवा साल आगे .....
काबर तैं उन्घावत हस नवा साल आगे
बइला कस कमावत हस नवा साल आगे
सावन के बदरा तैं,
जेठ के होथस घाम
थामे रहिथस आगू
चिरहा कथरी लगाम
बढ़-बढ़ गोठियावत हस नवा साल आगे
देखे बर जियरा तरसे
जेवरा-सिरसा के मेला
मुड ले उतार गरु
ऐसो,कर्जा धमेला
पाई-पाई बचावत हस नवा साल आगे
सोनकुवर मागे होही
तोर ले हिसाब
दे ना बिसाहू गा
ओला जवाब
मया-कती बगरावत हस नवा साल आगे
कुशियार खा के
भुर्री ला तापे
कनिहा भर पानी
तरिया म नापे
तहीं तै मेछरावत हस नवा साल आगे
दुकलहा के घर में
फुटत हे फटाका
लइका बिहाव नेवते
सोहारी-बरा खा
बराती बने जावत हस नवा साल आगे
सुशील यादव

छतीसगढ़ी ::प्यास मरत हन ::

हमू ला कछु निशानी दे  दो
चुहके बर आमा चानी दे दो
#
मरत प्यास हन जम के भइय्या
मतलहा तनक, पानी दे दो
#
रहीम घला, भला राम बने
अलगु-जुम्मन,कहानी दे दो
#
इहां चांउर दु ठोम्हा खातिर
हमर अंगठा निशानी दे दो
#
कटत नइये, बुढापा अमसुर
हमर मागे ,जवानी दे दो
सुशील यादव


असल हमर चिन्हारी नइये ::सुशील यादव
@
हमर हाथ म रापा नइये, हमर हाथ कुदारी नइये
तोर ठप्पा का लगायेन,असल हमर चिन्हारी नइये
@
इहि डहर ले आवत होही
नवा साल इहि रद्दा आय
हमला छुए बर माते हव
खेल हमर  थू बद्दा आय
बैरी मन,जम के रिसाये,दे बर उनला गारी नइये
@
अबड़ जबर सँसो के टुकनी
दिखत हवय कोन बोहइय्या ?
डर के मारे लुकाय फिरत
किजर-किंजर हांका परइय्या
कइसनो हमर पहा जाही,बचे जिनगी भारी नइये
@
तुंहर पलंग ठाठ देखन
अपने खर्रा खाट देखन
सपना म बस अंजोर करेव
गंवई-राज, बाट देखन
कल के सुवाद का बतावन,खट्टा-भाजी अमारी नइये

1२.१.१७

का नफा नुकसान हे भाई
तुहर अलग भगवान हे भाई

रुख राई ला काट मढ़ाएव
गाव उही पहिचान हे भाई

तरिया पार पीपर हवा में
बर्नी भर अथान हे भाई

चिरइ चिरगुन के बसेरा में
बिहिनिया के अजान हे भाई

एके पेड़ ऐ जनम उगा लो
इहि म जम्मो ज्ञान हे भाई

सुशील यादव
२५.६.१६

सुनव हमर सरकार.....

पानी पलोय ओतके ,जतका के दरकार
पनछुटहा सब भाग के ,खबर लिही सरकार

रखव जी लीप पोत के ,साथी तीर-तखार
सफई के अभियान में ,माते हे सरकार

हांका जम के पार दो ,सकलाय गोतियार
सुध लेवय न चेत धरय,काबर जी सरकार

ईद-दिवाली सब मनय,अपने - अपन तिहार
महंगाई 'बम' झन फुटय,सुनव हमर सरकार

सुशील यादव

हमर घर ले नहक के जाबे

कइसने मरे-बिहान हे गा
इही कोती दइहान हे गा

खेत-खार तोर सोन उगले
भाग में हमर गठान हे गा

एसो बादर जम के बरसय
फोकट पानी दुकान हे गा

कीचड़-काचड़, लदर- फदर हे
रसता बहुते असान हे गा

महंगाई के का रोवासी
भाजी-भात अथान हे गा

हमर गाव के हवे चिन्हारी
मनखे जियत मशान हे गा

हमर घर ले नहक के जाबे
सुग्घर बने रेंगान हे गा

सुशील यादव
१३.७.१६

२६.७.१६
धतूरा सही जहर......

नदिया अइसन बाढ़ में छेके नइ जाय
नासमझी के पथरा कहुं फेके नइ जाय

देखे बर, देख लेथन तुन्हर मनमानी
अतलंग करय्या के अतलंग देखे नइ जाय

घोर के पी डारेन धतूरा सही जहर
करू बोली अउ गोठ के केहे नइ जाय

अंगाकर के सुवाद कहुं शहर में लुकागे
बिन चुल्हा अंगाकर बने सेके नइ जाय

कतको कमाबो इहचे छोड़बो- मड़ाबो
जावत खानी कोनो कछु ले के नइ जाय

सुशील यादव
१७.७.१६


०००० मोरो बर लातेस ....

रखिया ला झन तोड़, रखियान दे न जी
 मनखे हे तेड़गा ,  सोझियान दे न जी

देख लेतेव महू ,चार-धाम कहु दिन
सुरता ल तोर झमाझम, आन दे न जी

तात-तात खावब म, लोगन बड़ जलथे
मया के 'चीला-फरा' , बसियान दे न जी

नइ करन कखरो ,जानत हिजगा- पारी
सुरसा के पेट नोहे ,अघान दे न जी

मोरो बर लातेस ,फबे असन  चूरी
नवा बहुरिया सरीख, लजान दे न जी

सुशील  यादव

छतीसगढ़ी ::प्यास मरत हन ::

हमू ला कछु निशानी दे  दो
चुहके बर आमा चानी दे दो
#
मरत प्यास हन जम के भइय्या
मतलहा तनक, पानी दे दो
#
रहीम घला, भला राम बने
अलगु-जुम्मन,कहानी दे दो
#
इहां चांउर दु ठोम्हा खातिर
हमर अंगठा निशानी दे दो
#
कटत नइये, बुढापा अमसुर
हमर मागे ,जवानी दे दो

सुशील यादव

असल हमर चिन्हारी नइये ::सुशील यादव
@
हमर हाथ म रापा नइये, हमर हाथ कुदारी नइये
तोर ठप्पा का लगायेन,असल हमर चिन्हारी नइये
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इहि डहर ले आवत होही
नवा साल इहि रद्दा आय
हमला छुए बर माते हव
खेल हमर  थू बद्दा आय
बैरी मन,जम के रिसाये,दे बर उनला गारी नइये
@
अबड़ जबर सँसो के टुकनी
दिखत हवय कोन बोहइय्या ?
डर के मारे लुकाय फिरत
किजर-किंजर हांका परइय्या
कइसनो हमर पहा जाही,बचे जिनगी भारी नइये
@
तुंहर पलंग ठाठ देखन
अपने खर्रा खाट देखन
सपना म बस अंजोर करेव
गंवई-राज, बाट देखन
कल के सुवाद का बतावन,खट्टा-भाजी अमारी नइये

1२.१.१७


६, आजा मोर संगी ....

फूलत नइए मन के मोंगरा
बिन तोरे फुलवारी
तोर बिन सुन्ना सुन्ना लागे
घर अंगना दुआरी
आजा आजा मोर संगी आजा संगवारी ......
##

दादा बरजे  भईया बरजे
अऊ  बरजे महतारी
तोर खातिर सहिथंव कतकोन
झगरा झन्झट गारी
आजा आजा मोर संगीं आजा संगवारी
##

दया मया ला अचरा बांधव
नाम के तोर बनवारी
सुरता के तोर संसो जस
टुकनी  बोहंव भारी
आजा आजा मोर संगीं आजा संगवारी                                                                                                    तोर बिन जुन्ना जुन्ना लागे
करम के पोलका सारी
बिन तोरे गड़थे  संगी
करधन सूंता बारी
आजा आजा मोर संगीं आजा संगवारी                                                                                                          
##

उत्ती देखंव बुडती देखंव
अऊ देखंव बियारी
बाट ल जोहव्  हाट म देखंव
तोर खातिर कुआरी
आजा आजा मोर संगीं आजा संगवारी

##


 ५. सिरा जाही माटी म....

चार दिन के जिनगी चहक लेते तै
चारों  खुंट बन- ठन चमक लेते तैं

                    बोई डारे बारी, तैं संसो पताल
                    गोदा ल बोतेस. महक लेते तै

करम के, बोरे- बासी हे सिठठा
नुन्छुर करे  बर, नमक लेते तैं

                    कोठी के बिजहा, किरहा- घुनहा
                    निमारे बर, सुपा- फटक लेते तै

दुब्बर के घर परिस दू-दू अकाल
'करम' के मेचका छपक लेते तैं

                    तइहा के बेरा जम्मो बईहा लेगे
                    सुरता के अंगना, फफक लेते तै

सिरा जाही माटी म माटी सियान
धोरकिन थिरा के भभक लेते तै    ,,,,,,सुशील यादव
@@@

४. बिछल्हा रद्दा.....(छ्तीसगढ़ी)

समधिन के गाँव ,चिखलाय असन जी
बिछल्हा रद्दा , आगी-लगाय असन जी

-नहाय नइये समधी, बसियाय असन वो
 छान्ही के बेदरा, खिसियाय असन वो

 बात-बात समधिन पारे
 एके ठन हाना
 चिक्कन चिक्कन सब ला परसे
 मोर थारी  ताना

ठेगा दिखावे , मेछराय   असन जी
बिछल्हा रद्दा , आगी-लगाय असन जी

बात-बात  समधी घलो ,
मारत रहिथे ताना
मुड-पीरवा घेरी-बेरी
किंजरे.. कछेरी-थाना

अपन 'बही' ले दीखे, असकट़ाय असन वो
छान्ही के बेदरा, खिसियाय असन वो

बड़े उमर के समधन तैं,
झन पारे कर हाना
 पाके चुंदी म बरोबर
 इतर-तेल  लगा-ना

कतको में अक्केला, महमाय असन वो
 ऐ गाव में तहिंच ,रखियाय  असन  वो

डोकरा होगेस समधी तें
तोर माडी-गोड पिराथे
एको कनी चलय नइये
रद्दा चिखला बताथे

मोर गाव के रद्दा, रेगाय असन जी
उतरत जवानी ते , डोकराय असन जी
२१.१२.१५



३. लतखोर जिन्दगी के प्रसंग

जिनगी के रद्दा, चिखलाय असन जी
मुड-पीरवा लर्ईका, रिसाय असन  जी

 नेता कहाथे ,पांच बच्छर म आथे
गोठे-गोठ  गारा, मताय असन जी

  नागर -बइला संग, कस के  कमाथे
  बीजहा धरे , फोकलाय असन जी

जकर- बकर, कोंदा शहर म रेंगय
गंवईहा टूरा, झकलाय असन जी

नोनी के बाबू ,सोन-हलवा  खवा दे
 तन-सोना होगिस , खियाय असन जी

आगू ले मानेव काबर , समधिन के बात
बरजत हे समधी , खिसियाय असन जी

@@@


२.  घनाक्षरी
छ्तीसगढ़ी...

 सुशील यादव

गुरतुर  रेहे  भाई ,तैं  कईसे अमटागे
बईहा जस कमाए ,गोंदा सही निछागे

 जगाए फिरत रेहे,अबड़ देवता-धामी
  लुवते-लुअत कांदी  ,जिनगानी  पहागे

 सियान के सियानी ले ,गोठे-बात नइ माने
बिन पानी जेला बोए ,  उही बीजा भथागे

जोता- सुमेला संग तें ,बईला ल फान्देस
मडई कोती काबर ,जी-जीवरा ढीलागे

रिसइया संगवारी , कस  नखरा ल झेले
अन्ते-तन्ते  डोंगा ,   'जतन' के बोहागे

काबर बड़का देखे ,महल के रे सपना
छोट्किन छान्ही के, जी खपरा उड़ा गे

 मिठलबरा के  गोठ ,लागे होही अंगाकर
थोरको  भुखाय बिन ,कतकोन  खवागे

सिताय असन लागे ,तब ले, माचिस-काड़ी
जड-जुरहा अंगना  ,भुर्री सिप्चागे

 @@@


chhattisgadhi
१. पंथी....धुन में ...

घर बार छोड़ के
मोह मया तोड़ के
आगेव मेहा जोडी मोर
मन  निबुआ निचोड़ के
राखे रहिबे पिरीत के
 धागा ल वो जोड़ के..... धागा ल वो

घर बार छोड़ के
मोह मया तोड़ के
कबर आयेस ते बईहा
 मन नीबुआ निचोड़ के
जानस नई ... थोरको  ,
 ददा भइय्या के दतारी
बना दीही तोला इन्हीचे
बिना हाथ गोड के.....

तोर खातिर बन जाहूं
लंगडा अउ लूला
फूंक लुहूँ पानी-
आगी  बिन चुलहा
खवा देहूँ मया के
ददा भइय्या रसगुल्ला
एक घांव कहि दे
जांगर बटोर के
घर बार छोड़ के ...

नइ  भावे मोला
गिदगिदहा  आमा
बिन गोड संगी
 झुलत पइजामा...
बिन हाथ के कतेक
 कइसन कमाबे
काला ते खाबे काला खवाबे
एदे बात ल सुन ले
लाख करोड़ के ....

भुर्री ल मिल जुल
मया के  सिप्चाबो
दादा -भईय्या-दाई
संगे- संग मनाबो ...
पहाड़- कस जिनगी
राई बनाबो
 पहा जाही दिन घलो
भितिया खरोड के
घर बार छोड़ के ...

धतूरा सही जहर......

नदिया अइसन बाढ़ में  छेके नइ जाय
नासमझी के पथरा कहुं फेके नइ जाय

 देखे बर, देख लेथन तुन्हर मनमानी
अतलंग करय्या के अतलंग देखे नइ जाय

 घोर के पी डारेन धतूरा सही जहर
करू बोली अउ गोठ के केहे नइ जाय

 अंगाकर के सुवाद कहुं शहर में लुकागे
बिन चुल्हा अंगाकर बने  सेके नइ जाय

 कतको कमाबे इहचे छोड़बे- मड़ाबे
जावत खानी कोनो कछु ले के नइ जाय
sushil yadav 
लुलवा के हाथ म डफली
तोतरा का तुतरु हवय
फस्करा के कब बैठही
सत्तर साल ले देश उखडू हवय

सुशील यादव



  पारस कहु ले लान के

लोकतंत्र के नाम ले ,पार डरो गोहार
कुकुर ओतके भोकही ,जतके चाबी डार

लहसुन मिर्चा टोटका,मिझरा डाल बघार
जतका झन ला नेवते,चांउर पुरत निमार

लोकतंत्र सुन्दर बिगुल,बजवइय्या हे कोन
अड़सठ-सत्तर साल के ,गणतंत्र हवे मौन

पारस कहु ले लान के ,छुआ दो एखर गोड़
माटी बनतिस सोन कस,गुन लोहा के  छोड़

सुशील यादव

26.1.2017

संग हमर तो आवव जी
##
पातर -पनियर खावव जी
थोरिक म अघावव  जी
#
तुहर करा तुरुप के इक्का
सिक्का तुम्ही चलावव जी
#
बघुवा इहाँ,बिन दांत-पंजा
गोदी घलो बिठावव  जी
#
फोकट के चाउर छोड़व
जांगर चलत कमावव जी
#
अन्ते-तँते बात करो झन
बनत-बात पतियावव जी
#
घूमे बर हे चार धाम कहु
खेत-खार तक जवावव जी
#
काबर संसो नुनछुर होथे
मीठ-मीठ गोठियावव जी
#
नइये कोनो संग चलइया
संग हमर तो आवव जी
##
 सुशील यादव
  23.2.17

Tuesday, 28 February 2017

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