Thursday, 2 March 2017


chhattisgadhi
१. पंथी....धुन में ...

घर बार छोड़ के
मोह मया तोड़ के
आगेव मेहा जोडी मोर
मन  निबुआ निचोड़ के
राखे रहिबे पिरीत के
 धागा ल वो जोड़ के..... धागा ल वो

घर बार छोड़ के
मोह मया तोड़ के
कबर आयेस ते बईहा
 मन नीबुआ निचोड़ के
जानस नई ... थोरको  ,
 ददा भइय्या के दतारी
बना दीही तोला इन्हीचे
बिना हाथ गोड के.....

तोर खातिर बन जाहूं
लंगडा अउ लूला
फूंक लुहूँ पानी-
आगी  बिन चुलहा
खवा देहूँ मया के
ददा भइय्या रसगुल्ला
एक घांव कहि दे
जांगर बटोर के
घर बार छोड़ के ...

नइ  भावे मोला
गिदगिदहा  आमा
बिन गोड संगी
 झुलत पइजामा...
बिन हाथ के कतेक
 कइसन कमाबे
काला ते खाबे काला खवाबे
एदे बात ल सुन ले
लाख करोड़ के ....

भुर्री ल मिल जुल
मया के  सिप्चाबो
दादा -भईय्या-दाई
संगे- संग मनाबो ...
पहाड़- कस जिनगी
राई बनाबो
 पहा जाही दिन घलो
भितिया खरोड के
घर बार छोड़ के ...

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