Thursday, 2 March 2017

छतीसगढी शब्द चित्र
नवा साल आगे .....
काबर तैं उन्घावत हस नवा साल आगे
बइला कस कमावत हस नवा साल आगे
सावन के बदरा तैं,
जेठ के होथस घाम
थामे रहिथस आगू
चिरहा कथरी लगाम
बढ़-बढ़ गोठियावत हस नवा साल आगे
देखे बर जियरा तरसे
जेवरा-सिरसा के मेला
मुड ले उतार गरु
ऐसो,कर्जा धमेला
पाई-पाई बचावत हस नवा साल आगे
सोनकुवर मागे होही
तोर ले हिसाब
दे ना बिसाहू गा
ओला जवाब
मया-कती बगरावत हस नवा साल आगे
कुशियार खा के
भुर्री ला तापे
कनिहा भर पानी
तरिया म नापे
तहीं तै मेछरावत हस नवा साल आगे
दुकलहा के घर में
फुटत हे फटाका
लइका बिहाव नेवते
सोहारी-बरा खा
बराती बने जावत हस नवा साल आगे
सुशील यादव

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