४. बिछल्हा रद्दा.....(छ्तीसगढ़ी)
समधिन के गाँव ,चिखलाय असन जी
बिछल्हा रद्दा , आगी-लगाय असन जी
-नहाय नइये समधी, बसियाय असन वो
छान्ही के बेदरा, खिसियाय असन वो
बात-बात समधिन पारे
एके ठन हाना
चिक्कन चिक्कन सब ला परसे
मोर थारी ताना
ठेगा दिखावे , मेछराय असन जी
बिछल्हा रद्दा , आगी-लगाय असन जी
बात-बात समधी घलो ,
मारत रहिथे ताना
मुड-पीरवा घेरी-बेरी
किंजरे.. कछेरी-थाना
अपन 'बही' ले दीखे, असकट़ाय असन वो
छान्ही के बेदरा, खिसियाय असन वो
बड़े उमर के समधन तैं,
झन पारे कर हाना
पाके चुंदी म बरोबर
इतर-तेल लगा-ना
कतको में अक्केला, महमाय असन वो
ऐ गाव में तहिंच ,रखियाय असन वो
डोकरा होगेस समधी तें
तोर माडी-गोड पिराथे
एको कनी चलय नइये
रद्दा चिखला बताथे
मोर गाव के रद्दा, रेगाय असन जी
उतरत जवानी ते , डोकराय असन जी
२१.१२.१५
समधिन के गाँव ,चिखलाय असन जी
बिछल्हा रद्दा , आगी-लगाय असन जी
-नहाय नइये समधी, बसियाय असन वो
छान्ही के बेदरा, खिसियाय असन वो
बात-बात समधिन पारे
एके ठन हाना
चिक्कन चिक्कन सब ला परसे
मोर थारी ताना
ठेगा दिखावे , मेछराय असन जी
बिछल्हा रद्दा , आगी-लगाय असन जी
बात-बात समधी घलो ,
मारत रहिथे ताना
मुड-पीरवा घेरी-बेरी
किंजरे.. कछेरी-थाना
अपन 'बही' ले दीखे, असकट़ाय असन वो
छान्ही के बेदरा, खिसियाय असन वो
बड़े उमर के समधन तैं,
झन पारे कर हाना
पाके चुंदी म बरोबर
इतर-तेल लगा-ना
कतको में अक्केला, महमाय असन वो
ऐ गाव में तहिंच ,रखियाय असन वो
डोकरा होगेस समधी तें
तोर माडी-गोड पिराथे
एको कनी चलय नइये
रद्दा चिखला बताथे
मोर गाव के रद्दा, रेगाय असन जी
उतरत जवानी ते , डोकराय असन जी
२१.१२.१५
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