Thursday, 2 March 2017


नुन्छुर कस मोला लगय ,बात-चीत व्यवहार
कस बिताबो पांच बछर, असकट मे सरकार

लिख-लिख ले अरजी घुमन,काखर-काखर द्वार
कोनो कान कहां धरय ,सुनय हमार गोहार

बिहिनिया कुकरा बासत,भूकय  कुकुर हजार
रुई गोजाय कान कस,निभय तुहार -हमार

आम आदमी बस कहव, आमा चुहके दारि
फिर बाद बेहाल करव,मारे-मार तुतारि

सुख के संगवारी हमर ,काबर रहे लुकाय
जउन मिले मिल बांट के ,देवी भोग लगाय

सुशील यादव

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