नुन्छुर कस मोला लगय ,बात-चीत व्यवहार
कस बिताबो पांच बछर, असकट मे सरकार
लिख-लिख ले अरजी घुमन,काखर-काखर द्वार
कोनो कान कहां धरय ,सुनय हमार गोहार
बिहिनिया कुकरा बासत,भूकय कुकुर हजार
रुई गोजाय कान कस,निभय तुहार -हमार
आम आदमी बस कहव, आमा चुहके दारि
फिर बाद बेहाल करव,मारे-मार तुतारि
सुख के संगवारी हमर ,काबर रहे लुकाय
जउन मिले मिल बांट के ,देवी भोग लगाय
सुशील यादव
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