५. सिरा जाही माटी म....
चार दिन के जिनगी चहक लेते तै
चारों खुंट बन- ठन चमक लेते तैं
बोई डारे बारी, तैं संसो पताल
गोदा ल बोतेस. महक लेते तै
करम के, बोरे- बासी हे सिठठा
नुन्छुर करे बर, नमक लेते तैं
कोठी के बिजहा, किरहा- घुनहा
निमारे बर, सुपा- फटक लेते तै
दुब्बर के घर परिस दू-दू अकाल
'करम' के मेचका छपक लेते तैं
तइहा के बेरा जम्मो बईहा लेगे
सुरता के अंगना, फफक लेते तै
सिरा जाही माटी म माटी सियान
धोरकिन थिरा के भभक लेते तै ,,,,,,सुशील यादव
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