०००० मोरो बर लातेस ....
रखिया ला झन तोड़, रखियान दे न जी
मनखे हे तेड़गा , सोझियान दे न जी
देख लेतेव महू ,चार-धाम कहु दिन
सुरता ल तोर झमाझम, आन दे न जी
तात-तात खावब म, लोगन बड़ जलथे
मया के 'चीला-फरा' , बसियान दे न जी
नइ करन कखरो ,जानत हिजगा- पारी
सुरसा के पेट नोहे ,अघान दे न जी
मोरो बर लातेस ,फबे असन चूरी
नवा बहुरिया सरीख, लजान दे न जी
सुशील यादव
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