221 2122 221 2122
हम जगह-जगह, दुनिया भटके गुमान लेकर
कोई जरूर आएगा नव-विहान लेकर
कुछ दाग जहन में बाकी है, जिसे मिटाने
जख्मो सहित निकल भी दौड़ो, निशान लेकर
इतराये जो पड़ौसी उसको तमीज दे-दो
आदत सुधार लें वो अमिट पहचान लेकर
मजबूत हैं इरादे तो बात ही नहीं है
वरना चले-चलोगे कैसे थकान लेकर
कोशिश करे सभी जन ,ऊंचा ललाट पाये
गौरव पलों में घूमे सब , हिन्दुस्तान लेकर
सुशील यादव
१३.६.१८
हम जगह-जगह, दुनिया भटके गुमान लेकर
कोई जरूर आएगा नव-विहान लेकर
कुछ दाग जहन में बाकी है, जिसे मिटाने
जख्मो सहित निकल भी दौड़ो, निशान लेकर
इतराये जो पड़ौसी उसको तमीज दे-दो
आदत सुधार लें वो अमिट पहचान लेकर
मजबूत हैं इरादे तो बात ही नहीं है
वरना चले-चलोगे कैसे थकान लेकर
कोशिश करे सभी जन ,ऊंचा ललाट पाये
गौरव पलों में घूमे सब , हिन्दुस्तान लेकर
सुशील यादव
१३.६.१८
No comments:
Post a Comment