Sunday, 12 August 2018

गुमान लेकर

221 2122 221 2122
हम जगह-जगह, दुनिया भटके गुमान लेकर
कोई जरूर आएगा नव-विहान लेकर

कुछ दाग जहन में बाकी है, जिसे मिटाने
जख्मो सहित निकल भी दौड़ो, निशान लेकर

इतराये जो पड़ौसी उसको तमीज दे-दो
आदत सुधार लें वो अमिट पहचान लेकर

मजबूत हैं इरादे तो बात ही नहीं है
वरना चले-चलोगे कैसे थकान लेकर

कोशिश करे सभी जन ,ऊंचा ललाट पाये
गौरव पलों में घूमे सब , हिन्दुस्तान  लेकर
सुशील यादव
१३.६.१८

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