वो कुछ दिनों से ....
२२१२ २२१२ 2२1२ 1२
अपनी जुबा से, बात मन की खोलता नहीं
वो कुछ दिनों से, आजकल फिर बोलता नहीं
खामोशियाँ उसकी, इशारा क्या करे बता
टूटे परो से, आसमा जो तौलता नहीं
दिल टूटने की हर अदा में सादगी रखे
पी ले ज़हर चुपचाप, ज़हर वो घोलता नहीं
पानी सा हो, उस खून का, क्या करता वो भला
घिर के मुसीबत- आफतो में खौलता नहीं
सुशील यादव
२२१२ २२१२ 2२1२ 1२
अपनी जुबा से, बात मन की खोलता नहीं
वो कुछ दिनों से, आजकल फिर बोलता नहीं
खामोशियाँ उसकी, इशारा क्या करे बता
टूटे परो से, आसमा जो तौलता नहीं
दिल टूटने की हर अदा में सादगी रखे
पी ले ज़हर चुपचाप, ज़हर वो घोलता नहीं
पानी सा हो, उस खून का, क्या करता वो भला
घिर के मुसीबत- आफतो में खौलता नहीं
सुशील यादव
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