Sunday, 12 August 2018

वो आजकल इन दिनों

वो कुछ दिनों से ....
२२१२    २२१२  2२1२  1२
अपनी जुबा से, बात मन की  खोलता नहीं
वो कुछ दिनों से, आजकल फिर बोलता नहीं

खामोशियाँ उसकी, इशारा क्या करे बता
टूटे परो से, आसमा जो  तौलता नहीं

दिल टूटने की हर अदा में सादगी रखे
पी ले ज़हर चुपचाप, ज़हर वो घोलता नहीं

पानी सा हो, उस खून का, क्या करता वो भला
घिर के मुसीबत- आफतो में खौलता नहीं

सुशील यादव

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