कहाँ तक छुपाये,,,?
कहाँ तक छुपाएं ,किस किस से छुपाएं
फटी कमीज हो गई ,तार-तार जिंदगी
याचना में जब भी
हाथ ये उठाये
लोग हमें शातिर
चोर ही ठहराए
कहाँ तक बताये किस किस को बताये
पार पर ही डूबी , बार -बार जिंदगी
हौसलो की पतंग
जब से कटी है
राहगीरों ने डोर
आस्था लुटी है
कहाँ तक मनाएं किस -किस को मनाएं
बची कहाँ है अब , सार -सार जिंदगी
पिछले कुछ दिन से
मन को हम झांकते
ईमान की तुला में
कद- वजन नापते
कहाँ तक बचाये, किस -किस को बचाएं
चक्रव्यूह में घिरी ,धार-धार जिंदगी
कलयुग में होता
हमको पछतावा
दुष्कर्मो का जब
फूटता है लावा
कहाँ तक हटाएँ, किस-किस को हटाएँ
ईंट-रोडे ये हैं बने ,द्वार-द्वार जिंदगी
सुशील यादव
१६.जुलाई १८
कहाँ तक छुपाएं ,किस किस से छुपाएं
फटी कमीज हो गई ,तार-तार जिंदगी
याचना में जब भी
हाथ ये उठाये
लोग हमें शातिर
चोर ही ठहराए
कहाँ तक बताये किस किस को बताये
पार पर ही डूबी , बार -बार जिंदगी
हौसलो की पतंग
जब से कटी है
राहगीरों ने डोर
आस्था लुटी है
कहाँ तक मनाएं किस -किस को मनाएं
बची कहाँ है अब , सार -सार जिंदगी
पिछले कुछ दिन से
मन को हम झांकते
ईमान की तुला में
कद- वजन नापते
कहाँ तक बचाये, किस -किस को बचाएं
चक्रव्यूह में घिरी ,धार-धार जिंदगी
कलयुग में होता
हमको पछतावा
दुष्कर्मो का जब
फूटता है लावा
कहाँ तक हटाएँ, किस-किस को हटाएँ
ईंट-रोडे ये हैं बने ,द्वार-द्वार जिंदगी
सुशील यादव
१६.जुलाई १८
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