वीरांगना रानी लक्ष्मी बाई के बलिदान दिवस १८जून पर
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तुम रक्षक हो सीमा-प्रहरी ,पथ में आगे बढे चलो
पहाड़ दुर्गम को लाघों,दुरूह घाटी चढ़े चलो
मानवता के तूल तुम्ही ,मिट्टी के हो कारीगर
बिन मन्दिर पूजे जावो ,मूरत वो भी गढ़े चलो
#
एक दिया तम में रखना ,एक जले आंधी आगे
हो अडिग विश्वास तुम्हारा ,सर-पैर ले दुश्मन भागे
सीमा से जब वापस आओ ,माँ के लाल बहन-वीरा
हर सुहागन दृग देखना , कैसे सोये दिन जागे
#
शांति जिसने जकड़ लिया, 'पर' अहिंसा के हैं काटे
मक्कारी चादर ओढ़े ,परचम जिहाद के बांटे
मजहब के चण्डालों का,मखौल क्यों नहीं उड़ाये ,
इनकी मकसद के जड़ को,क्यों न अभी कतरें- छांटे
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लक्ष्मी-बाई सा साहस ,अपने भीतर आप भरो
जीवन शब्दकोश निकालो ,कायरता से काश डरो
लोहा लेने की बारी , कतार पीछे क्या रहना
जन-जन में चिश्वास जगे ,आपतकाल तुझे लड़ना
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मर्दानों की शक्ति लेकर , एक रानी रण में आई
उम्र की कोमल काया थी ,उतरी न थी तरुणाई
अंग्रेजो को रण में तब ,कैसे खूब छकाती थी
वो थी रानी झाँसी या ,संदेश भरी पाती थी
सुशील यादव
16.6.18
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तुम रक्षक हो सीमा-प्रहरी ,पथ में आगे बढे चलो
पहाड़ दुर्गम को लाघों,दुरूह घाटी चढ़े चलो
मानवता के तूल तुम्ही ,मिट्टी के हो कारीगर
बिन मन्दिर पूजे जावो ,मूरत वो भी गढ़े चलो
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एक दिया तम में रखना ,एक जले आंधी आगे
हो अडिग विश्वास तुम्हारा ,सर-पैर ले दुश्मन भागे
सीमा से जब वापस आओ ,माँ के लाल बहन-वीरा
हर सुहागन दृग देखना , कैसे सोये दिन जागे
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शांति जिसने जकड़ लिया, 'पर' अहिंसा के हैं काटे
मक्कारी चादर ओढ़े ,परचम जिहाद के बांटे
मजहब के चण्डालों का,मखौल क्यों नहीं उड़ाये ,
इनकी मकसद के जड़ को,क्यों न अभी कतरें- छांटे
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लक्ष्मी-बाई सा साहस ,अपने भीतर आप भरो
जीवन शब्दकोश निकालो ,कायरता से काश डरो
लोहा लेने की बारी , कतार पीछे क्या रहना
जन-जन में चिश्वास जगे ,आपतकाल तुझे लड़ना
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मर्दानों की शक्ति लेकर , एक रानी रण में आई
उम्र की कोमल काया थी ,उतरी न थी तरुणाई
अंग्रेजो को रण में तब ,कैसे खूब छकाती थी
वो थी रानी झाँसी या ,संदेश भरी पाती थी
सुशील यादव
16.6.18
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