Wednesday, 20 June 2018



चाँद-चौथ  करवा अभी ,छलनी ओट निहार
साजन तुमसे मांगती ,सुख जीवन आधार
सुख जीवन आधार ,मांगती रजत न सोना
रखू भविष्य निखार ,समर्पित तुझको कोना
दया-क्षमा औ त्याग,लूँ रथ में सबको फांद   ,
सुविधा से फिर जाग ,मैं देखूं करवा-चाँद

१.
तेरा दिल बस छोड़ के ,बाकी सब बकवास
तुझको केवल देख के ,आनन रहे उजास
आनन रहे उजास ,कहीं मिल जाय तसल्ली
दे  इतना वरदान ,गिरे ना अपनी गिल्ली
भूखे रख लो आप ,शाम से होय सबेरा
सभी मुखड़े से सटीक,परी सा मुखड़ा तेरा

२.
मौसम काटों का कभी ,हो जाए अनुकूल
वेलेंटाइन तुम भेजना ,मुझे प्यार से  फूल
मुझे प्यार से फूल .महक हो  तेरी प्यारी
सुन लेती फरियाद,सुकोमल हृदया नारी
शनै-शनै हर बात , घाव पर लगना  मरहम
आता वापस लौट ,वहीं  काटों का मौसम

३.
देखूं करवा- चौथ में ,छलनी चाँद निहार
साजन तुमसे चाहती ,सुख जीवन आधार
सुख जीवन आधार ,मांगती रजत न सोना
रखू भविष्य निखार ,समर्पित तुझको कोना
दया-क्षमा  औ त्याग ,प्रेम यश सबसे सीखूं
सुविधा से फिर जाग, चाँद मैं करवा देखूं


गिनती की हैं रोटियां,मतलब  के रखवाल
जनता अपने  खून में,पाती नहीं उबाल
पाती नहीं उबाल , किसे आ कौन  उबारे
है माया छल-कपट, छोड़ दें कौन  सहारे
पापी-लोभी-दुष्ट,बात व्यभिचारी खलती
गली नहीं जब  दाल,रोटी की किधर गिनती

सुशील यादव
 6
सबकी नजरों से गिरे ,बदले दल हर बार
आँखों पट्टी बाँध जो ,गिन-गिन थके हजार
गिन-गिन थके हजार, समझ कुछ ये सब पायें
जब निर्धन  के हाथ ,पांच-दस मुश्किल आवे
मन्नत की  उस बात ,लगा -लेते सौ डुबकी
लालच तेरी देख ,झुकी नजरे हैं सबकी
सुशील यादव

7

टेलीपेथी ...
बिना पते की चिट्ठियां ,देता कौन पठाय
आंसू-धड़कन साथ ही ,मन सारा अकुलाय
मन सारा अकुलाय,व्यर्थ का रोना-धोना
लिखा हुआ जो भाग ,कहे ग्यानी वो होना
प्रीतम मिलती  सीख,संग दुख के जब जीना
दिखे ऊंच ही नीच ,सभी सुख आधार बिना
##
8
आज ...
कौन-कहाँ जा बैठता,माया रूप जहाज
ना कुनबे की छाँव ना,नियमो भरा समाज
नियमो भरा समाज ,उलंघन से  छुटकारा
नहीं खेद-दण्ड-दहशत ,आपसी भाईचारा
क्रूर- क्रूर अपराध,आदमी है  मौन यहाँ
कोई कुछ भी कर रहा ,फिक्र करता कौन कहाँ
सुशील यादव

9
खंगाल रहे क्यों मिया ,नियम और कानून
फतवा एक निकालिये ,सब लो भट्टी  भून
सब लो भट्टी  भून,गड़े  मजहब का  झंडा
रखना अपने पास ,सड़े करतूतों फंडा
गौरवशाली देश ,निरे तुम कंगाल रहे
वैसे अपना अहित ,आप ही खंगाल रहे
सुशील यादव दुर्ग

१0
हैरान कहीं देखकर ,बदल न पाए लोग
पाखंडी-पापी  चढ़े,छप्पन- छप्पन भोग
छप्पन- छप्पन भोग,ऊँगलिया पाँचो घी में
आस्था की ये लाश ,बहा दो कहीं नदी में
रहते बेबस लोग,दिखे ना मुस्कान सहीं
करती है ये बात ,मुझे बस हैरान कहीं
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११
रखोगे किस किस का ,मन में ख्याल हिसाब
भूलो छीटें खून के ,ये तकदीर जनाब
ये तकदीर जनाब ,भूल हिस्सा बटवारा
जो किस्मत मिल जाय,उसी पे आस-गुजारा
अपने हिस्से स्वांग,ख़ुशी के और भरोगे
जब अरमानो दीप ,बराबर ध्यान रखोगे
सुशील यादव
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१२
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निकला जगत खरीदने,कौड़ी हाथ छदाम
इस माया संसार का,किसके पास लगाम
किसके पास लगाम,कौन करता रखवाली
हाथ इशारो पुलिस,उच्चके  चोर मवाली
ऐसे में लूटो झपट,यही सोचे मन पगला
चोला  है बैराग ,खरीदने जगत निकला
१३
कमर झुकी लाचार बन ,चलता रहा समाज
बेइलाज बूढ़ा हुआ  ,सत्तर साल सुराज
सत्तर साल सुराज ,आँख पहचान सके  कम
कभी  सुन सका  कान. कौन है सरकार  नरम
दिखे  लाचार बहुत ,रहा कोई  अजर-अमर
लाठी गम की टेक ,करो सीधी झुकी कमर
१४


गिनती की हैं रोटियां,मतलब  के रखवाल
जनता अपने  खून में,पाती नहीं उबाल
पाती नहीं उबाल , आकर कोई उबारे
है माया छल-कपट,किसके कौन सहारे
पापी-लोभी-दुष्ट,व्यभिचारी  बात बनती
गली कहाँ ये दाल,रोटी की किधर गिनती

सुशील यादव

सबकी नजरों से गिरे ,बदले दल हर बार
आँखों पट्टी बाँध जो ,गिन-गिन थके हजार
गिन-गिन थके हजार, समझ कुछ ये सब पायें
जब निर्धन  के हाथ ,पांच-दस मुश्किल आवे
मन्नत की  उस बात ,लगा -लेते सौ डुबकी
लालच तेरी देख ,झुकी नजरे हैं सबकी
सुशील यादव



टेलीपेथी ...
बिना पते की चिट्ठियां ,देता कौन पठाय
आंसू-धड़कन साथ ही ,मन सारा अकुलाय
मन सारा अकुलाय,व्यर्थ का रोना-धोना
लिखा हुआ जो भाग ,कहे ग्यानी वो होना
प्रीतम मिलती  सीख,संग दुख के जब जीना
दिखे ऊंच ही नीच ,सभी सुख आधार बिना
##

आज ...
कौन-कहाँ जा बैठता,माया रूप जहाज
ना कुनबे की छाँव ना,नियमो भरा समाज
नियमो भरा समाज ,उलंघन से  छुटकारा
नहीं खेद-दण्ड-दहशत ,आपसी भाईचारा
क्रूर- क्रूर अपराध,आदमी है  मौन कहाँ
कोई कुछ भी कर रहा ,फिक्र करता कौन कहाँ
सुशील यादव


खंगाल रहे क्यों मिया ,नियम और कानून
फतवा एक निकालिये ,सब लो भट्टी  भून
सब लो भट्टी  भून,गड़े  मजहब का  झंडा
रखना अपने पास ,सड़े करतूतों फंडा
गौरवशाली देश ,निरा तू कंगाल रहा
वैसे अपना अहित ,आप ही खंगाल रहा
सुशील यादव दुर्ग

रखोगे किस किस का ,मन में ख्याल हिसाब
भूलो छीटें खून के ,ये तकदीर जनाब
ये तकदीर जनाब ,भूल हिस्सा बटवारा
जो किस्मत मिल जाय,उसी पे आस-गुजारा
अपने हिस्से स्वांग,ख़ुशी के और भरोगे
जब अरमानो दीप ,बराबर ध्यान रखोगे
सुशील यादव
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कुण्डलिया छन्द का विधान उदाहरण सहित
कुण्डलिया है जादुई, छन्द श्रेष्ठ श्रीमान|
दोहा रोला का मिलन, इसकी है पहिचान||
इसकी है पहिचान, मानते साहित सर्जक|
आदि-अंत सम-शब्द, साथ बनता ये सार्थक|
लल्ला चाहे और, चाहती इसको ललिया|
सब का है सिरमौर छन्द, प्यारे, कुण्डलिया||


कुण्डलिया छन्द का विधान उदाहरण सहित

कुण्डलिया है जादुई
२११२ २ २१२ = १३ मात्रा / अंत में लघु गुरु के साथ यति
छन्द श्रेष्ठ श्रीमान|
२१ २१ २२१ = ११ मात्रा / अंत में गुरु लघु
दोहा रोला का मिलन
२२ २२ २ १११ = १३ मात्रा / अंत में लघु लघु लघु [प्रभाव लघु गुरु] के साथ यति
इसकी है पहिचान||
११२ २ ११२१ = ११ मात्रा / अंत में गुरु लघु
इसकी है पहिचान,
११२ २ ११२१ = ११ मात्रा / अंत में लघु के साथ यति
मानते साहित सर्जक|
२१२ २११ २११ = १३ मात्रा
आदि-अंत सम-शब्द,
२१ २१ ११ २१ = ११ मात्रा / अंत में लघु के साथ यति
साथ, बनता ये सार्थक|
२१ ११२ २ २११ = १३ मात्रा
लल्ला चाहे और
२२ २२ २१ = ११ मात्रा / अंत में लघु के साथ यति
चाहती इसको ललिया|
२१२ ११२ ११२ = १३ मात्रा
सब का है सिरमौर
११ २ २ ११२१ = ११ मात्रा / अंत में लघु के साथ यति
छन्द प्यारे कुण्डलिया||
२१ २२ २११२ = १३ मात्रा
at 12:39

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