Wednesday, 20 June 2018



लोग कहते अब.....

अब यहां ना आशियाँ- परिंदा बचा
यार बारूद का धुँआ बस धुँआ बचा

ले गया फिर  छीन बस्ती कोई अमन
डबडबायी आँख आँगन कुँआ बचा

कौन सूरत  आप  पहचानता यहाँ
पास किसके आजकल  आइना बचा

वो सभी पल याद हमको  करीब से
वो जहां बस  आदमी  झुनझुना बचा

हाँ मुझे भी लौटना है 'सुशील' पास
लोग कहते अब वहीँ मन 'घना' बचा

सुशील यादव दुर्ग
2122   2122  1212

20.6.18

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