Wednesday, 20 June 2018

' जो भूला ....

दिल रखने को तुझे दिया क्या है
तू ही बता कि फ़ायदा क्या है

यारा बुझा दिया चिरागो को
जलता हुआ यहाँ बचा क्या है

मुहताज हैं खुदा यहाँ हम भी
ये मुफलिसी सिवा मिला क्या है

अब तिलस्मी लगी हमे दुनिया
देखे ये  फैलता नशा क्या है

चारो तरफ है भीड़ का उन्माद
नारो के बीच निकलना क्या है

मजबूरियों 'सुशील' जो भूला
अब तो बता सही पता क्या है

सुशील यादव दुर्ग


खोज लिया जिसने .....

जब दुश्मन जाने पहचाने हैं
यारो हम भी बहुत सयाने हैं

लेकर अपनी बस राम-कहानी
समझौतों के सहज निशाने हैं

मुस्कान मिली तो जीवन छलका
यूँ गम के सौ-सौ अफसाने हैं

जग को दे न सके अपना परिचय
कहने के कई लाख बहाने हैं

किसने हमको कब तौला-परखा
हम बीते इतिहास पुराने हैं

खोज लिया जिसने दिल को भीतर
पाए असल 'सुशील' खजाने हैं

सुशील यादव
14.7.17

No comments:

Post a Comment