नव भारत 5.5.19 को प्रकाशित व्यंग रचना : प्रभु मेरे
प्रभु मेरे अवगुन
क्या प्रभु आप हमेशा मेरे अवगुन को चित्त में धर लेते हो?
अपोजिशन को ज़रा देखते भी नहीं | वहां कितना लोचा है |
प्रभु आपको मालुम नहीं जमाना बदल गया है |
हाईकमान के पास जाओ तो पूछते हैं, तुम्हारे कितने केस पेडिंग चल रहे हैं ? दो-चार बताओ तो वे कहते हैं ,हवा आने दो इधर दस-दस वाले लाईन लगाए फिर रहे हैं |
टिकट बाटने वाले आजकल बायोडाटा जैसे पढ़ते ही नहीं |
कैश इन हेंड वाले कालम में दस-बीस करोड़ न दिखे तो आपका आवेदन रद्दी की टोकरी में झोल खाये पतंग माफिक गिर जाता है |
बात ये नहीं की हम कार्यालय बाहर फिरने वाले दलालो से न मिलें हो |
वे हमे साइड का रास्ता ऑफर कर चुके हैं मगर वे जमे नहीं | कारण कि बहुत छुटभैयों के नाम सामने आये ,उनके दाम भी ऊँचे लगे | वे कहते कि टिकट तो पक्की जानिये, पैसा उप्पर तक जाएगा |आप हमसे संपर्क के बाद सीधे कांस्टीट्यूएंसी में प्रचार हेतु जा सकते हो |
प्रभु इनका कांफीडेंस देख के लगता है, प्रजातन्त्र की नीव बहुत गहरी होते जा रही है | सबका साथ- सबका विकास को तरजीह देने का समय अच्छा निकल आया लगता है ?
प्रभु आप अन्तर्यामी हैं | आपको मैं जीतने पर कितना चढ़ाऊंगा खूब जानते हैं |
आपसे कभी धोखा किया हो तो कहें ?
प्रभु हमें लम्बी मार्जिन वाली जीत नहीं चाहिए, बस जीत चाहिए | प्रभु आपने सपने में हमे जो निर्देश दे रखे थे, सब का पालन करते रहे |
आपने कहा था अब नाली -सड़क के नाम पर मतदाता रीझते नहीं |
उन्हें विकास के झमेलों से भी कोई सरोकार नहीं, बस तुम्हारे आंकड़े बोला करें काफी है|
भक्तजन हमें ,-हमारे तम्बू में रहने का हमको बुरा कदापि नहीं लगता |
हम धर्म की हानि होने पर अवतरित होने का वचन दिए ,बंधे हैं तो कष्ट उठाने में शर्म कैसी | हमारी तो इस विषय में चिता करने की जरूरत नहीं ....|
और हाँ ये भी बता दें ,इसी नाम से मतदाताओं से अपना उल्लू सीधा करते जाओ .... भगवान .... यानी हम स्वयं आपकी मदद करंगे | समझे की नइ .... भोलू ?
प्रभु यही बात तो आपसे पिछले कई इलेक्शन मुलाकातों में हुई |
आप मुकर जाते हो | भगवान हो के ऐसा करना अशोभनीय है कहूँगा, तो आप मुझे यहीं खड़े-खड़े निपटा देंगे?
इस इलेक्शन की कई नई योजना की जानकारी दे दूँ | हमारी पार्टी ने गठबंधन किये हैं | छोटे छोटे दलो को झांसे में ले रखा है | वे सोचते हैं ,हम उनको जागीर थमा देंगे | मगर वे जीतने वाले कहाँ हैं ,हमे उनकी जात ,शक्ल ,मजहब वालो को सन्देशा भेजना है हम उनके खैरख्वाह हैं ,इससे दुसरे सीट पर फर्क गिरेगा |
प्रभु पार्टी ने आरक्षण के नाम का नया विंडो खोला है | नौकरी दें या न दें ,वे पाएं या ना पाएं हमे कहने- सुनने में लुभावना लगा ,भाषण देने में वजन फील किये रहते हैं , सो इसे भी लगा रहे हैं | प्रभु पिछली बार लोगों को कुछ कैश देने का वादा कर बैठे थे आप सजेस्ट करे,-- इससे कैसे निपटें ....? क्या कहा लिमिट बढा दें ...? दुगना कर दें, ना प्रभु ना ये उनके साथ ना इंसाफी होगी ... और हाँ ... अपने रांची-आगरा वाले सब पागलखाने ओव्हर क्राउडेड चल रहे हैं | हमारे इस बयान की असफलता पर उनको सम्हालने के लिए इन्तिजाम होने तक कुछ दूसरा बताएं |
देखो भक्त तुम लोग गंगा को 'बाढ़' की वजह से साफ होते हर साल देखते हो ,सफाई का बहुत सा पैसा इसी से एडजस्ट हो जाता है , तुम ... यानी तुम जैसे नेता -अधिकारी का इसे कमाई के नजरिये से देखना हमे अखरता नही ,कोई बात नहीं आदत सी हो गई है ...?
बताऊं ! इस बार मेरे कुम्भ इन्तिजाम में किये काम से मैं खुश हूँ | मतलब साफ है इसका मुआवजा तुम्हे नहीं मांगने पर भी दे जाऊंगा |
मैं तो शाबासी के लहजे में ,कहूंगा लगे रहो मुन्ना भाई.... |
तुम जानते हो न ,डुबकी 'आस्था' की हो तो फल देने में हमारा डिपार्टमेंट कोई कोताही नही करता ....|
देखे अब की , -कैसे डुबकी लगती है ,कितने देर की लगती है .....?
-प्रभु की आज्ञा पर ठंडे पानी में जोर की डुबकी हर-हर गङ्गे के नाम से हम लगा बैठे ....
इस चक्कर में रजाई खिसक के , कमर से खूब नीचे चली गई .... लगा बहुत सा पानी मेरे नथुनों में घुस गया है |
सुशील यादव
न्यू आदर्श नगर Zone 1 Street 3
दुर्ग
9408807420
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Sushil Yadav
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प्रभु हमें लम्बी मार्जिन वाली जीत नहीं चाहिए, बस जीत चाà
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