चाँद में सुलभ शौचालय व्यवस्था
इंस्पेक्टर माता दीन के बाद मेरा बुलावा चाँद से आया |
बाकायदा एलियन- यान में मुझे सादर, चाँद की धरती पर उतार दिया गया |
मैंने पूछा मुझे अपराधी की तरह धरती से उठा लाने का मकसद मैं जान सकता हूँ ?
वे बोले घबराइए मत हमने बहुत पड़ताल के बाद आपके रूप में बहुआयामी आदमी का चयन चाँद के लिए किया है |
आप ने अपने देश में शौचालय- क्रांति लाने के लिए अनेक अखबारों में बार- बार गुहार लगाई है| कई धरना आयोजित किए |आपके शौचालय पर लिखे अनेक लेख से चाँद वाले प्रभावित होते रहे | अब चूँकि , हमारे चाँद पर शीघ्र ही मानव दल का आगमन संभावित है |जाहिर है वे शौच भी करंगे | हमे चाँद की स्वच्छ जमीन पर मानव गंदगी का कूड़ा नहीं देखना है | आप हमें स्वच्छ- जीवन के पाठ पढाते- सिखाते रहें |
आप जानते हैं अमेरिका-रसिया –चीन वाले , पिछली विजिट में कद्दू- लौकी टाइप के कई बीज फेक गए हैं , उसकी फसल इस धरती पर जोरों से लहलहा रही है , हमारे लिए वो सब खर-पतवार के लेबल का है , हम आपको वो इलाका दिखाने ले चलेंगे |
मैंने कहा वो तो ठीक है , मैं जानना चाहता हूँ , इससे पहले एक मिस्टर मातादीन भी इधर आये थे उनका क्या हुआ ?
वे चाँद पर मेरी एतिहासिक जानकारी से खुश हुए |
अपने गार्ड को मुझे मातादीन चौक ले जाने का इशारा किया |
देखिये मिस्टर लेखक ! हाँ , जब तक आपको चाँद सरकार कोई नाम नहीं देती, तब तक आप इसी नाम से यहाँ संबोधित होंगे | हाँ तो हम कह रहे थे, आपके इंस्पेक्टर मातादीन को हम चाँद वाले काकू की तरह , काकू बोले तो आपके तरफ के बापु....समझते हैं ना ? वैसे ही मानते हैं | हालात ये है, यहाँ जगह –जगह सड़क रोड , चौराहे सब में उनका नाम फिट हो गया है |
एक चौराहे पर उनकी आदमकद स्टेचू में फूल माला लगी थी , मैंने पूछा मातादीन दिवंगत हो गए क्या ?
मैंने अंदाजा लगाया तक़रीबन सिक्सटी इयर हो गये होंगे उन्हें आये ...उस पर उनकी खुद की उम्र .?
वे कान पर हाथ धरते हुए बोले नहीं , वे मरे नहीं हैं ....ऐसा सोचना पाप है | उनकी कान वाली अगाध- श्रधा देख कर भारतीय होने का गर्व हुआ | उन्होंने बताया ,हमारे तरफ जो रिटायर हो जाते हैं उनको ये फूल माला पहना कर सार्वजिनक सम्मान दिया जाता है|उनको किसी भी बाहरी से मिलने जुलने की पाबंदी होती है |वे चाँद के सीक्रेट को साझा कर सकें ऐसे अनुमान को सिरे से रद्द करने का ये चोखा-चाँद फार्मूला कहलाता है | चाहें तो आप इस विषय में पी एच डी करने का लुफ्त उठा सकते हैं |
मैंने अनुमान लगाया करीब दस साल बाद,तक अगर यहाँ टिक गया तो , मेरी पोजीशन ठीक यही होगी | मुझे अच्छा भी लगा |
मैंने एहतियातन , खालिस हिन्दुस्तानी दिमाग लगाते हुए पूछ लिया .... आपके तरफ कोई बेईमानी करे तो उसकी सज़ा क्या है ...?
वे आखे ततेर कर मेरी ओर देखे , उन्हें लगा मैं खास- हिन्दुस्तानी अंदाज में पेश हो गया हूँ | मुझे तत्काल इस बात का अहसास हो गया | मैंने सफाई में कहा यूँ ही जानकारी के लिए पूछ रहा था | इस वाकिये को अपने जेहन से निकाल दीजिये |
वे बोले हम ऐसों को त्रिशंकु में फ़ेंक देते हैं |
त्रिशंकु ! आपने यहाँ आते हुए देखा होगा |विज्ञान के किस्सों में, जिसे ब्लेक –होल कहते हैं, वैसा ही होता है | उधर सब जा तो सकता है , वापिस आता नहीं ....| आपने देखा होगा ..... कैसे एक्स्ट्रा गियर और एक्स्ट्रा फियुल के साथ यान को इस त्रिशंकु - बार्डर क्रास करवाया जाता है ....?अकेले आदम जात को बस अपने ढाचे के गलने तक सडना होता है ?
आरंभिक पूछ-ताछ सत्र के बाद मैंने पूछा आप लोगों को चाँद पर शौचालय बनाने का एकाएक ख्याल कैसे आया ?
वा जनाब , क्या हम इंडियन इकानामी से इतने नावाकिफ लगते हैं आपको ?
हमारे तरफ हर कंट्री का अख़बार आता है ?
हमारा नेट चार – पाँच जी वाला नहीं, सैकड़ों जी वाला एडवांस टेक्नोलाजी का है ....?
एक रीजन, जो शुरू में बताया कि आने वाले सालों में चाँद- विजिट के बंपर आफर जो आप धरती वालों ने विज्ञापित कर रखे हैं, हमारे तरफ लोगो की वैसी भीड़ पलेगी जैसे साठ-सत्तर के दशक में हिंदी सिनेमा की प्रीमियर रीलीज पर टिकट विंडो में होती थी | चन्द्र यान यात्रा के लिए सैकड़ों रॉकेट आपके हरिकोटा और दीगर जगह के सेटेलाईट लांचर में कतार में खड़े होने वाले हैं |
दूसरी बात ये , कुछ ऊपर वाले परमात्मा भी कोविड- ट्रांसफर केस को चाँद पर पुनर्जन्म देने की योजना बना सकते हैं , कहा नहीं जा सकता ? ऐसे ढेरों जन्म को यहाँ अकोमोडेट करने की नैतिक जिम्मेदारी चाँद प्रशासन की होगी .....?
आप निश्चिंत रहें !,आप अकेले पर समूचे काम का बोझ नहीं डालेंगे | आप अपने चहेते ठेकेदारों –कमैय्या लोगों की लिस्ट दे देवे , सप्ताह बाद वे सब इधर दिखेंगे |
उन्होंने मुझसे पलट कर पूछ लिया ,आप एक बात का खुलासा कीजिये , अचानक आपके तरफ शौचालय ली मांग इतनी क्यों बढ़ गई ....?
देहात में लोग मजे से प्रकृति का आनन्द लेते शौच क्रिया से फारिग हो लेते थे ,,,,?
मैं ऐसे असहज प्रश्न के लिए कतई तैयार नहीं था, डिप्लोमेटिक जवाब देते कहा , बात यूँ है उधर राज्य प्रशासन मंनरेगा चलाती है यानी मजदूरों को काम की गेरंटी यानि पेमेंट , यानी मजदूरों को फूल दो टाइम का खाना ,,,,,स्कूलों में मिड डे मील देती है , यानी बच्चो का फूल टाइम खाना , इन बच्चो के माँ- बाप द्वारा बच्चों के लिए बनाये - बचे अतिरिक्त भोजन का सेवन खुद कर लेते हैं ,यानि एक्सेस इटिंग , शहर में बर्गर –पिज्जा के सैकड़ों स्टाल , चौबीस घंटे खाना .... आप समझ सकते हैं इन सब खानों का जवाब मलद्वार के मार्फत ही तो आएगा .....?
दूसरी बात अपनी कंट्री में बाहर के शिंजो आबे ,ओबामा ,ट्रम्प, पुतिन ,शिनपिन ,टैप लोगों का न्योंता बढ़ गया , अब उनसे सैकड़ों किलोमीटर की रेल पटरी को कहाँ तक ढांप पाते .....? लिहाजा .....
वे इशारों में बात समझ गए |
मेरी मानिए आप इधर भी पापुलर स्कीम मंनरेगा , बच्चों को स्कुल में मिड डे मील की व्यवस्था करवा दें |
वैसे आबादी के बढ़ने की आप लोग अभी सालों प्रतीक्षा कर सकते हैं ?
आगे आपकी कंट्री की बेहतरी और जानकारी के लिए मेरे पास योजनाओं की लम्बी फेहरिस्त है, मसलन
सुई में धागा डालने के नियम से लेकर फाइटर प्लेन,मित्र राष्ट्र से कैसे बिना कमीशन के ख़रीदे ,,,,,,आदि
ये सब नियमावली का डिजाइन आप कहें तो आपके देश में प्रचलित दलाली के दायरे से बाहर की बनाई जा सकती है |
बोले तो “त्रिशंकु- खौफ लेश”....
विश्वास रखे ! काम की उच्च क्वालिटी आपको मातादीन- माफिक, खालिस हिन्दुस्तानी टच वाली मिलेगी |
जयहिंद .....
सुशील यादव
न्यू आदर्श नगर
जोन 1 स्ट्रीट 3 दुर्ग , छत्तीसगढ़
mob: 7000226712
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