Friday, 15 July 2022

जी बहलता नहीँ

 

जी बहलता नहीं.....

*

क़ोई गड़ा हमको खजाना दे दो

कुछ मुस्कुराने का बहाना दे दो 

*

जी बहलता भी अब नहीँ ख्वाबों से 

यादों का मंजर सब पुराना दे दो

*

साथी निभा ले साथ भूला वादा 

या फासलों वाला जमाना दे दो

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काटे सितम में सादगी क़े दिन -रात

लाकर कहीं से वो सताना दे दो

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ताबीज पाने की तलब तुमसे क्या

बीमार को लेकिन ठिकाना दे दो

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बोलो कहाँ मौजूद हो तुम भगवान 

हर आदमी में सनक सयाना दे दो 

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बातों क़े झगड़े यूँ नहीँ सुलझेंगे

इतिहास में दर्ज अफ़साना दे दो

*

ये कातिलों की बस्तियों में शामिल

लाखों तबाही उसे निशाना दे दो 

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सुशील यादव

 न्यू आदर्श नगर दुर्ग छत्तीसगढ़

 मोबाइल 7000 226 712


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