जी बहलता नहीं.....
*
क़ोई गड़ा हमको खजाना दे दो
कुछ मुस्कुराने का बहाना दे दो
*
जी बहलता भी अब नहीँ ख्वाबों से
यादों का मंजर सब पुराना दे दो
*
साथी निभा ले साथ भूला वादा
या फासलों वाला जमाना दे दो
*
काटे सितम में सादगी क़े दिन -रात
लाकर कहीं से वो सताना दे दो
*
ताबीज पाने की तलब तुमसे क्या
बीमार को लेकिन ठिकाना दे दो
*
बोलो कहाँ मौजूद हो तुम भगवान
हर आदमी में सनक सयाना दे दो
*
बातों क़े झगड़े यूँ नहीँ सुलझेंगे
इतिहास में दर्ज अफ़साना दे दो
*
ये कातिलों की बस्तियों में शामिल
लाखों तबाही उसे निशाना दे दो
**
सुशील यादव
न्यू आदर्श नगर दुर्ग छत्तीसगढ़
मोबाइल 7000 226 712
No comments:
Post a Comment