2122 1222 2122 22
दर्द का दर्द से जब रिश्ता बना लेता हूं
इस बहाने सभी को अपना बना लेता हूं
@
ख़ास कुछ हैं मुकर जाते बात से अपनी
आदमी मान के अलग रास्ता बना लेता हूं
@
मज़हबी दौड़ में जा के मुल्क क्या हासिल करे
खौफ में अब धमाका ज्यादा बना लेता हूं
@
धूप में ढूढ़ता मै साया किसी बरगद का
छाँव क़ोई कसीदा मन का बना लेता हूं
@
फूल से है मुझे रंज खुशबुओं से परहेज
याद में बारहा क्यूं बगीचा बना लेता हूं
@
बहलता अब नहीं आपे से जमाना बाहर
खुश वहाँ हो सकूँ घरोबा बना लेता हूँ
@
सुशील यादव
न्यू आदर्श नगर
zone-1 स्ट्रीट 3 दुर्ग छत्तीसगढ़
7000 226712
---------- Forwarded message ---------
From: sushil yadav <sushil.yadav151@gmail.com>
Date: Mon, May 9, 2022, 6:46 PM
Subject: ग़ज़ल
To: ahazindagi <ahazindagi@dbcorp.in>
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दर्द का दर्द से जब रिश्ता बना लेता हूं
इस बहाने सभी को अपना बना लेता हूं
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ख़ास कुछ हैं मुकर जाते बात से अपनी
आदमी मान के अलग रास्ता बना लेता हूं
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मज़हबी दौड़ में जा के मुल्क क्या हासिल करे
खौफ में अब धमाका ज्यादा बना लेता हूं
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धूप में ढूढ़ता मै साया किसी बरगद का
छाँव क़ोई कसीदा मन का बना लेता हूं
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फूल से है मुझे रंज खुशबुओं से परहेज
याद में बारहा क्यूं बगीचा बना लेता हूं
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बहलता अब नहीं आपे से जमाना बाहर
खुश वहाँ हो सकूँ घरोबा बना लेता हूँ
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सुशील यादव
न्यू आदर्श नगर
zone-1 स्ट्रीट 3 दुर्ग छत्तीसगढ़
7000 226712
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