Friday, 15 July 2022

दर्द का दर्द से

 

2122 1222 2122 22

दर्द का दर्द से जब रिश्ता बना लेता हूं

इस बहाने सभी को अपना बना लेता हूं

@

ख़ास कुछ हैं मुकर जाते बात से अपनी

आदमी मान के अलग रास्ता बना लेता हूं

@

मज़हबी दौड़ में जा के मुल्क क्या हासिल करे

खौफ में अब धमाका ज्यादा बना लेता हूं

@

धूप में ढूढ़ता मै साया किसी बरगद का

छाँव क़ोई कसीदा मन का बना लेता हूं

@

फूल से है मुझे रंज खुशबुओं से परहेज

याद में बारहा क्यूं बगीचा बना लेता हूं

@

बहलता अब नहीं आपे से जमाना बाहर

खुश वहाँ हो सकूँ घरोबा बना लेता हूँ

@

सुशील यादव

न्यू आदर्श नगर

zone-1 स्ट्रीट 3 दुर्ग छत्तीसगढ़

7000 226712


---------- Forwarded message ---------

From: sushil yadav <sushil.yadav151@gmail.com>

Date: Mon, May 9, 2022, 6:46 PM

Subject: ग़ज़ल

To: ahazindagi <ahazindagi@dbcorp.in>



2122 1222 2122 22

दर्द का दर्द से जब रिश्ता बना लेता हूं

इस बहाने सभी को अपना बना लेता हूं

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ख़ास कुछ हैं मुकर जाते बात से अपनी

आदमी मान के अलग रास्ता बना लेता हूं

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मज़हबी दौड़ में जा के मुल्क क्या हासिल करे

खौफ में अब धमाका ज्यादा बना लेता हूं

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धूप में ढूढ़ता मै साया किसी बरगद का

छाँव क़ोई कसीदा मन का बना लेता हूं

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फूल से है मुझे रंज खुशबुओं से परहेज

याद में बारहा क्यूं बगीचा बना लेता हूं

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बहलता अब नहीं आपे से जमाना बाहर

खुश वहाँ हो सकूँ घरोबा बना लेता हूँ

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सुशील यादव

न्यू आदर्श नगर

zone-1 स्ट्रीट 3 दुर्ग छत्तीसगढ़

7000 226712


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