Thursday, 14 July 2022

आजकल जाने क्यों

 आजकल जाने क्यों.....

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एक गलत सोच, आखों की स्याही बदल देता है
समूचे शहर को बारूदी , तबाही बदल देता है
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फर्क पड़ता नहीं तुम्हारे ऐशो- आराम में तनिक
आंकड़ो की मुनादी ही बस गवाही बदल देता है
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रिश्तों को निभाना इतना नहीं  आसान आपस में
जुबान की जरा तलखी आवाजाही  बदल देता है
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मजबूरी ये कि हम बदल नहीं सकते खुद पडोसी
सामने का मुल्क बातों की कड़ाही बदल देता है
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छीन कर ले जाता था कोई मेरा चैन -करार वही
आजकल जाने क्यों तरीका उगाही बदल देता है
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सुशील यादव
न्यू आदर्श नगर,जोन 1 स्ट्रीट 3 A
दुर्ग छत्तीसगढ़
मोबाईल :7000226712
2.....
2212 2212   1222
यूँ ही मुझे जो शर्मसार  करना था
शर्मिंदगी बेशक  इजहार करना था
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मिलती जमाने से अगर इजाजत नहीँ
छिपते- छिपाते तुझको प्यार करना था
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अपनों क़े मरने से निराश कुछ होते
गम सूखने का  इंतिजार करना था
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लाये उठा जो आफ़ताब पहले ही
तो रात समझौता सौ बार करना था
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है  सामने बिकते उसूल क़े नजीर
मगर उसी पे हमें एतबार करना था
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3...
2212  2212 222
बात तल्ख़ सी
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मेरी जुबां जब भी फ़िसल जाती है
कुछ बात तल्ख़ सी बस निकल जाती है
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खामोश हो जीने का मकसद भी क्या
खामोशियाँ गम में बदल जाती है
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बैसाख या आषाड़ सावन भादो
मजबूरियां मौसम निगल जाती है
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उसको तराशे  थे हमी जी जान से
हीरे की सूरत अब तो खल जाती है
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लाखों की  चाहे हो कमाई दौलत
सरकार की नजर आजकल जाती है
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सुशील यादव
न्यू आदर्श नगर,जोन 1 स्ट्रीट 3 A
दुर्ग छत्तीसगढ़
मोबाईल :7000226712

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4.

2212 2212 2122

सनसनी....

अब तो यहाँ इस बात की सनसनी है

हाथों में पत्थर, और जान पे बनी है

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हमने तराशा हीरे की शक्ल-सूरत

लिपटी वहीं पे तरबतर चाशनी है

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सरकार हैं क्यूँ आग बबुला से मेरे

दब कौन सी नस गई, चढ़ी झुंझुनी है

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खामोश हो जीने का मकसद यहाँ क्या

आसार बारिश ,मेघ परतें घनी है

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ये फैसलों क़े बाल सारे हैं सफेद

राहत यहां कमजोर सी संगनी है

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तुम हो कहां सब आजमाने लगे हैं

उम्मीद की हर किरण अब अनमनी है

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रहबर मिले तो मंजिले खूब आसान

वरना तो खुल्ले आम अब रहजनी है

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सुशील यादव 

न्यू आदर्श नगर,जोन 1 स्ट्रीट 3 A

दुर्ग

 छत्तीसगढ़

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