Thursday, 14 July 2022


रायता फैलाने वाले .....


शुरू-शुरू में इस


रायता फैलाने वाले .....


शुरू-शुरू में इस वाक्यांश से जब मेरा परिचय हुआ, तब इसके मायने की गूढ़ता को समझने में थोड़ी अड़चन आई |

रायता को मैं ही क्या , हम सब,बफे-सिस्टम ईजाद होने के बाद , शादी-ब्याह में परसे जाने वाले पुराने छांछ के, नवीन संस्करण के रूप में जानते हैं |

अब आम चलन में इसके बिना छप्पन-भोग में मात्र पचपन का स्वाद लिया जान कर, मन में अधूरे पन का अहसास होता है |


 कई लोग अपने मृत्यु-भोज का मीनू तय करके मरना चाहते हैं |


वे बकायदा फेमली डिस्कसन के बाद, अपने घर वालों को हिदायत दिए जाते हैं कि उनकी याद में परसे जाने वाले भोज्य में रायता 'एक आइटम' जरूर हो |


जिस तरह  फिल्मो के आइटम सांग से दर्शक प्रभावित होते हैं , ये  लोग मानने लगे  हैं कि, हिट और सुपरहिट का नुस्खा या राज कहीं न कहीं इस 'आइटम' पीछे छुपा है |


इधर फैमली मेंबर बीच, आक्सीजन  इंतजाम के खुसुर पुसुर से जो लोग  अपनी संभावित  मृत्यु का आकलन कर्ता बन जाते हैं , मैं उनको 'एम बी ऐ, डिग्री धारियों' का 'बाप' समझता हूँ |


कुछ मास्टर माइंड धारी, अक्सर ये सोच कायम कर लेते हैं , “साले ,जिंदगी भर हम कमाए ,बचा-वचा के ले तो न जा सकेंगे ,तो खर्च का रायता क्यों न  फैलाते जायँ”..... 

 

ऐसा ही खयाल प्रतिष्ठित सम्मानीय   पुरोहित ,"पण्डित भोजनालय" के  प्रोपाइटर ,चार - मंजिले लॉज,होटल व्यवसायी,करोना चपेट में आ कर  लगभग जिंदा बचे  भयग्रस्त  श्यामलाल जी को  आया।

कुछ- कुछ, उनके जी में ये भी आया  कि,चलो ,जीते-जी,मरणासन्न होने के ढोंग को, रायता कटोरी में रख देखें....?


वे अक्सर दैनिक समाचार पत्रों में  निधन समाचार पढ़ते।

अपने हम उम्र लोगों के निधन पर चर्चा करना,और मोबाइल नंबर उपलब्ध हो तो परिवार को सांत्वना देना  नही भूलते ।

परिवार वाले जितना उनको टेंशन फ्री रखने की जुगत करते वे उतना ही डिप्रेस होते ।


उनके हरकतों की जानकारी  विस्तार से मुझे मुहैया कराई गई।मेरा उनसे दोस्ती का पिछला दुरुस्त  रिकार्ड  ,उन्हें इस बात के लिए प्रेरित किया हो? बहरहाल मैं संकट मोचक भूमिका में उपलब्ध हो गया।


मैं ,ये क्या हाल बना रखा है ,कुछ लेते क्यों नहीं स्टाइल में दाखिल हुआ । लँगोटिये , ये बता ......सब तुम्हारी सेवा में तत्पर हैं तुझे क्या चाहिए ?  औलादे ,तुम्हारे बताये मार्ग पर चलेगी .....?

-तुमने उनके लिए जी-जान एक कर ,सब सुविधाएं उपलब्ध करा दी ।आज तेरी मर्जी चलेगी ।

श्यामलाल ने कहा,मेरे बेटे, अपने -अपने हिस्सो का -अपना धंधा मजे-मजे सम्हाले बैठे है।इन चार में से तीन का मत है, मृत्यु- भोज अनावश्यक खर्च है । इस बाबत वे सामाजिक मीटिंग में कई बार बोल चुके हैं।


चौथा अमेरिका में रहता है ,विदेशी कल्चर वाली बहु है। उसे  यहां के क्रियाकलाप में शामिल होने का क्या सरोकार .....?  मौक़ा मिलेगा या नहीं कुछ कहा नहीं जा सकता ...?

 इन अमेरिका वालों के  पास  ऐन वक्त पर ख़ास जगह ,नहीं पहुचने के कई बहाने होते हैं।

आज के दौर में ताजा-ताजा रटा-रटाया करोना बहाना सामने है ? 

उधर  के लोग तुरंत ,तत्काल या इमरजेंसी में भी आकर टाइमली कन्धा देने से रहे ? 

मैं अपने उठावने को भव्य देखने की तमन्ना रखता हूं ।

बिलकुल अपने दादा की तरह बैंड बाजा और ढेर सारे लोगों के साथ मरघट मार्ग तय करना चाहता हूं। 


-दरअसल सुशील भाई ,यही चिंता कभी- कभी मेरी भी रातों की नींद उड़ा देती है | आए दिन सरकारी घोषणा कि दस बीस लोगों में मरने वाले को निपटा दिया जाए,मुझे व्यवस्था के विपरीत सोचने को विवश कर देती है। 

हाय,इस काल में रूदाली भी मिलने से रही ?


सच कहूँ तो ,मैं खुद की मृत्य-भोज पार्टी में , अपने करीबियों को, नखरे  करते देखने का आनंद लेना चाहता हूँ|


बाज दफे, मैंने कई शादी-ब्याह और दूसरे आयोजनों   में लोगों को तरह-तरह के नुस्ख निकालते देखा है |


कुछ कमेंट्स जो याद हैं ,बताये देता हूँ,


- स्साले ने हराम के पैसों में कितनी बड़ी नुमाइश लगा दी है|”रायता देखो .... पानी है” ...


हरमी ने ,बहुत सारे कार्ड बंटवा दिए ... खाने का इन्तिजाम भी उसी ढंग का होना मांगता की नइ....? 


छिछोड़े का “रायता देखो .... छाछ  में नामक डाल रखा है”। पता नही क्या उप्पर ले जाएगा ।


साले  अमीरो को  गिफ्ट की पड़ी रहती है, सिवाय गिफ्ट के कुछ सूझता नहीं ..... “रायता देखो .....


-इस रायते को देख भला कौन कहेगा सेठ धनपत के बेटे का  बुलावा रिशेप्शन है” |


सुशील भाई ,ये रंग-ढंग देखकर मैं चाहता हूँ समाज एक बार तृप्त होकर, 

वो कहते हैं न, घीसू-माधो, मुंशी प्रेमचन्द स्टाइल वाली दावत छक के उड़ा ले।


मुझे परमानन्द की अनुभूति होगी ?

मेरी वैतरणी में मानो ट्रेक्टर टायर लग जायेंगे ।


आज के ये बच्चे मृत्यु-भोज के अपोजिट लाख लेक्चर दें, हम पुराने लोगों की परंपराओं को तोड़ के कोई नई बात साबित नहीं कर पाएंगे |


परलोक सुधारने का नाम लेते ही इन बच्चों को , दिवंगत नानी रौद्र रूप में नजर आने लगती हैं| 


मुझे मालुम है,मार्डन जमाने के बच्चे  इसे फिजूलखर्ची मान के  हाथ  खींचने के प्रयास जरूर करेंगे  ? 


मुझे अनाथ -बेसहारा की केटेगरी में, ‘ऊपर जाना’ एकदम अखर जाएगा।

उस लोक में भी तो चार के सामने होने वाली फजीहत की सोच के दिल बैठा जाता है।....... मेरी मायूसी और हताशा को आप समझ रहे ना .... ?


- मुझको अपनी औलाद से ज्यादा आप पर भरोसा है |


-आप एक काम करना, मैं पोस्ट डेटेड चेक दिए देता हूँ, आप मेरा सद्कर्म बिना किसी को खबर हुए, धूमधाम से करवा देना|


सबके मुह को बंद करने वाला भोज होना चाहिये , वो भी , क्वालिटी रायता के साथ |


-मैंने कहा पण्डित जी आप अभी दो-तीन महीने में थोड़े बिदा हो रहे हैं ?


- फिर मजाक के लहजे में ये भी जोड दिया कि  रोज चेक काटते –भुनाते का लम्बा   तजुरबा रखते  हैं ,फिर काहे भूल रहे चेक इशु तारिख से फकत  तीन महीने तक वैलिड होते हैं  .....


अरे ये तो मैने ध्यान नहीं दिया , कोई बात नहीं वे गंभीर थे, बोले , कल ही पाँच लाख की 'एफ डी' आपके एकाउंट में जमा कर  देता हूँ .


जिंदगी का क्या भरोसा ....?


मैने कहा शयामलाल जी , इतने पैसो का अब करना क्या ? 


क्यों भइ ? 


_आपको मालुम नहीं..... अब कानून सारे बदल गये हैं, मय्यत- मातमपुर्सी में बीस लोगों के शरीक होने का फरमान अमल में लाया जा रहा है।

 आपके चक्कर में पुलिस मुझे जरूर उठा लेगी ।

आपके वो जमाने लद गए जब  नामी  –गिरामी के  उठावने मिसाल हुआ करते थे । सैकड़ों लोग  बिना बुलाए हाजिर होंते थे ।


-यार तू एक काम कर , मय्यत की फिकर न कर वो जैसे भी सरकारी फरमान माफिक निपटा देना ....मगर पार्टी वाली बात पर गौर करना ....बोले तो खर्चे की रकम और बढ़ा देता हूँ .....


.....अपने तरफ हर कानून में तोड़ की गुंजाइश तो रहती है ,तू दस बीस होटल  बुक करना जहां रिश्तेदारों की फौज हों हर उस शहर में  , जहां समधीयाने में   दस बीस आदमी मिले, भोज व्यवस्था  का निमंत्रण  देना , आपकी सरकार आपके द्वार माफिक मैनेजमेंट हो ।

निमन्त्रण... पाकर कम से कम.पांच छह सौ जीम लें  मेरी आत्मा तृप्त जो जाएगी .....हाँ रायते के स्वाद में किसी दिन कोई कमी न रहे ....बस 


मुझे लगा शयामलाल का ‘वांछित – दिन’,क्या पता , इसी साल की किसी  तारीख में मुकर्रर हो शायद ....|


सुशील यादव 



Sushil Yadav

 New Aadarsh Nagar zone 1 Street 3 durg Chhattisgarh

susyadav7@gmail.com

9426 764 552

 वाक्यांश से जब मेरा परिचय हुआ, तब इसके मायने की गूढ़ता को समझने में थोड़ी अड़चन आई |

रायता को मैं ही क्या , हम सब,बफे-सिस्टम ईजाद होने के बाद , शादी-ब्याह में परसे जाने वाले पुराने छांछ के, नवीन संस्करण के रूप में जानते हैं |

अब आम चलन में इसके बिना छप्पन-भोग में मात्र पचपन का स्वाद लिया जान कर, मन में अधूरे पन का अहसास होता है |


 कई लोग अपने मृत्यु-भोज का मीनू तय करके मरना चाहते हैं |


वे बकायदा फेमली डिस्कसन के बाद, अपने घर वालों को हिदायत दिए जाते हैं कि उनकी याद में परसे जाने वाले भोज्य में रायता 'एक आइटम' जरूर हो |


जिस तरह  फिल्मो के आइटम सांग से दर्शक प्रभावित होते हैं , ये  लोग मानने लगे  हैं कि, हिट और सुपरहिट का नुस्खा या राज कहीं न कहीं इस 'आइटम' पीछे छुपा है |


इधर फैमली मेंबर बीच, आक्सीजन  इंतजाम के खुसुर पुसुर से जो लोग  अपनी संभावित  मृत्यु का आकलन कर्ता बन जाते हैं , मैं उनको 'एम बी ऐ, डिग्री धारियों' का 'बाप' समझता हूँ |


कुछ मास्टर माइंड धारी, अक्सर ये सोच कायम कर लेते हैं , “साले ,जिंदगी भर हम कमाए ,बचा-वचा के ले तो न जा सकेंगे ,तो खर्च का रायता क्यों न  फैलाते जायँ”..... 

 

ऐसा ही खयाल प्रतिष्ठित सम्मानीय   पुरोहित ,"पण्डित भोजनालय" के  प्रोपाइटर ,चार - मंजिले लॉज,होटल व्यवसायी,करोना चपेट में आ कर  लगभग जिंदा बचे  भयग्रस्त  श्यामलाल जी को  आया।

कुछ- कुछ, उनके जी में ये भी आया  कि,चलो ,जीते-जी,मरणासन्न होने के ढोंग को, रायता कटोरी में रख देखें....?


वे अक्सर दैनिक समाचार पत्रों में  निधन समाचार पढ़ते।

अपने हम उम्र लोगों के निधन पर चर्चा करना,और मोबाइल नंबर उपलब्ध हो तो परिवार को सांत्वना देना  नही भूलते ।

परिवार वाले जितना उनको टेंशन फ्री रखने की जुगत करते वे उतना ही डिप्रेस होते ।


उनके हरकतों की जानकारी  विस्तार से मुझे मुहैया कराई गई।मेरा उनसे दोस्ती का पिछला दुरुस्त  रिकार्ड  ,उन्हें इस बात के लिए प्रेरित किया हो? बहरहाल मैं संकट मोचक भूमिका में उपलब्ध हो गया।


मैं ,ये क्या हाल बना रखा है ,कुछ लेते क्यों नहीं स्टाइल में दाखिल हुआ । लँगोटिये , ये बता ......सब तुम्हारी सेवा में तत्पर हैं तुझे क्या चाहिए ?  औलादे ,तुम्हारे बताये मार्ग पर चलेगी .....?

-तुमने उनके लिए जी-जान एक कर ,सब सुविधाएं उपलब्ध करा दी ।आज तेरी मर्जी चलेगी ।

श्यामलाल ने कहा,मेरे बेटे, अपने -अपने हिस्सो का -अपना धंधा मजे-मजे सम्हाले बैठे है।इन चार में से तीन का मत है, मृत्यु- भोज अनावश्यक खर्च है । इस बाबत वे सामाजिक मीटिंग में कई बार बोल चुके हैं।


चौथा अमेरिका में रहता है ,विदेशी कल्चर वाली बहु है। उसे  यहां के क्रियाकलाप में शामिल होने का क्या सरोकार .....?  मौक़ा मिलेगा या नहीं कुछ कहा नहीं जा सकता ...?

 इन अमेरिका वालों के  पास  ऐन वक्त पर ख़ास जगह ,नहीं पहुचने के कई बहाने होते हैं।

आज के दौर में ताजा-ताजा रटा-रटाया करोना बहाना सामने है ? 

उधर  के लोग तुरंत ,तत्काल या इमरजेंसी में भी आकर टाइमली कन्धा देने से रहे ? 

मैं अपने उठावने को भव्य देखने की तमन्ना रखता हूं ।

बिलकुल अपने दादा की तरह बैंड बाजा और ढेर सारे लोगों के साथ मरघट मार्ग तय करना चाहता हूं। 


-दरअसल सुशील भाई ,यही चिंता कभी- कभी मेरी भी रातों की नींद उड़ा देती है | आए दिन सरकारी घोषणा कि दस बीस लोगों में मरने वाले को निपटा दिया जाए,मुझे व्यवस्था के विपरीत सोचने को विवश कर देती है। 

हाय,इस काल में रूदाली भी मिलने से रही ?


सच कहूँ तो ,मैं खुद की मृत्य-भोज पार्टी में , अपने करीबियों को, नखरे  करते देखने का आनंद लेना चाहता हूँ|


बाज दफे, मैंने कई शादी-ब्याह और दूसरे आयोजनों   में लोगों को तरह-तरह के नुस्ख निकालते देखा है |


कुछ कमेंट्स जो याद हैं ,बताये देता हूँ,


- स्साले ने हराम के पैसों में कितनी बड़ी नुमाइश लगा दी है|”रायता देखो .... पानी है” ...


हरमी ने ,बहुत सारे कार्ड बंटवा दिए ... खाने का इन्तिजाम भी उसी ढंग का होना मांगता की नइ....? 


छिछोड़े का “रायता देखो .... छाछ  में नामक डाल रखा है”। पता नही क्या उप्पर ले जाएगा ।


साले  अमीरो को  गिफ्ट की पड़ी रहती है, सिवाय गिफ्ट के कुछ सूझता नहीं ..... “रायता देखो .....


-इस रायते को देख भला कौन कहेगा सेठ धनपत के बेटे का  बुलावा रिशेप्शन है” |


सुशील भाई ,ये रंग-ढंग देखकर मैं चाहता हूँ समाज एक बार तृप्त होकर, 

वो कहते हैं न, घीसू-माधो, मुंशी प्रेमचन्द स्टाइल वाली दावत छक के उड़ा ले।


मुझे परमानन्द की अनुभूति होगी ?

मेरी वैतरणी में मानो ट्रेक्टर टायर लग जायेंगे ।


आज के ये बच्चे मृत्यु-भोज के अपोजिट लाख लेक्चर दें, हम पुराने लोगों की परंपराओं को तोड़ के कोई नई बात साबित नहीं कर पाएंगे |


परलोक सुधारने का नाम लेते ही इन बच्चों को , दिवंगत नानी रौद्र रूप में नजर आने लगती हैं| 


मुझे मालुम है,मार्डन जमाने के बच्चे  इसे फिजूलखर्ची मान के  हाथ  खींचने के प्रयास जरूर करेंगे  ? 


मुझे अनाथ -बेसहारा की केटेगरी में, ‘ऊपर जाना’ एकदम अखर जाएगा।

उस लोक में भी तो चार के सामने होने वाली फजीहत की सोच के दिल बैठा जाता है।....... मेरी मायूसी और हताशा को आप समझ रहे ना .... ?


- मुझको अपनी औलाद से ज्यादा आप पर भरोसा है |


-आप एक काम करना, मैं पोस्ट डेटेड चेक दिए देता हूँ, आप मेरा सद्कर्म बिना किसी को खबर हुए, धूमधाम से करवा देना|


सबके मुह को बंद करने वाला भोज होना चाहिये , वो भी , क्वालिटी रायता के साथ |


-मैंने कहा पण्डित जी आप अभी दो-तीन महीने में थोड़े बिदा हो रहे हैं ?


- फिर मजाक के लहजे में ये भी जोड दिया कि  रोज चेक काटते –भुनाते का लम्बा   तजुरबा रखते  हैं ,फिर काहे भूल रहे चेक इशु तारिख से फकत  तीन महीने तक वैलिड होते हैं  .....


अरे ये तो मैने ध्यान नहीं दिया , कोई बात नहीं वे गंभीर थे, बोले , कल ही पाँच लाख की 'एफ डी' आपके एकाउंट में जमा कर  देता हूँ .


जिंदगी का क्या भरोसा ....?


मैने कहा शयामलाल जी , इतने पैसो का अब करना क्या ? 


क्यों भइ ? 


_आपको मालुम नहीं..... अब कानून सारे बदल गये हैं, मय्यत- मातमपुर्सी में बीस लोगों के शरीक होने का फरमान अमल में लाया जा रहा है।

 आपके चक्कर में पुलिस मुझे जरूर उठा लेगी ।

आपके वो जमाने लद गए जब  नामी  –गिरामी के  उठावने मिसाल हुआ करते थे । सैकड़ों लोग  बिना बुलाए हाजिर होंते थे ।


-यार तू एक काम कर , मय्यत की फिकर न कर वो जैसे भी सरकारी फरमान माफिक निपटा देना ....मगर पार्टी वाली बात पर गौर करना ....बोले तो खर्चे की रकम और बढ़ा देता हूँ .....


.....अपने तरफ हर कानून में तोड़ की गुंजाइश तो रहती है ,तू दस बीस होटल  बुक करना जहां रिश्तेदारों की फौज हों हर उस शहर में  , जहां समधीयाने में   दस बीस आदमी मिले, भोज व्यवस्था  का निमंत्रण  देना , आपकी सरकार आपके द्वार माफिक मैनेजमेंट हो ।

निमन्त्रण... पाकर कम से कम.पांच छह सौ जीम लें  मेरी आत्मा तृप्त जो जाएगी .....हाँ रायते के स्वाद में किसी दिन कोई कमी न रहे ....बस 


मुझे लगा शयामलाल का ‘वांछित – दिन’,क्या पता , इसी साल की किसी  तारीख में मुकर्रर हो शायद ....|


सुशील यादव 



Sushil Yadav

 New Aadarsh Nagar zone 1 Street 3 durg Chhattisgarh

susyadav7@gmail.com

9426 764 552


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