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1.
2212 2212 222
बात तल्ख़ सी
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मेरी जुबां जब भी फ़िसल जाती है
कुछ बात तल्ख़ सी बस निकल जाती है
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खामोश हो जीने का मकसद भी क्या
खामोशियाँ गम में बदल जाती है
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बैसाख या आषाड़ सावन भादो
मजबूरियां मौसम निगल जाती है
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उसको तराशे थे हमी जी जान से
हीरे की सूरत अब तो खल जाती है
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लाखों की चाहे हो कमाई दौलत
सरकार की नजर आजकल जाती है
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सुशील यादव
न्यू आदर्श नगर,जोन 1 स्ट्रीट 3 A
दुर्ग छत्तीसगढ़
मोबाईल :7000226712
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2.
2212 2212 2122
सनसनी....
अब तो यहाँ इस बात की सनसनी है
हाथों में पत्थर, और जान पे बनी है
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हमने तराशा हीरे की शक्ल-सूरत
लिपटी वहीं पे तरबतर चाशनी है
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सरकार हैं क्यूँ आग बबुला से मेरे
दब कौन सी नस गई, चढ़ी झुंझुनी है
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खामोश हो जीने का मकसद यहाँ क्या
आसार बारिश ,मेघ परतें घनी है
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ये फैसलों क़े बाल सारे हैं सफेद
राहत यहां कमजोर सी संगनी है
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तुम हो कहां सब आजमाने लगे हैं
उम्मीद की हर किरण अब अनमनी है
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रहबर मिले तो मंजिले खूब आसान
वरना तो खुल्ले आम अब रहजनी है
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सुशील यादव
न्यू आदर्श नगर,जोन 1 स्ट्रीट 3 A
दुर्ग छत्तीसगढ़
मोबाईल :7000226712
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