Friday, 15 July 2022

बात तल्ख़ सी

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2212 2212 222

बात तल्ख़ सी

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मेरी जुबां जब भी फ़िसल जाती है

कुछ बात तल्ख़ सी बस निकल जाती है

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खामोश हो जीने का मकसद भी क्या

खामोशियाँ गम में बदल जाती है

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बैसाख या आषाड़ सावन भादो

मजबूरियां मौसम निगल जाती है

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उसको तराशे थे हमी जी जान से

हीरे की सूरत अब तो खल जाती है

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लाखों की चाहे हो कमाई दौलत

सरकार की नजर आजकल जाती है

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सुशील यादव

न्यू आदर्श नगर,जोन 1 स्ट्रीट 3 A

दुर्ग छत्तीसगढ़

मोबाईल :7000226712


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2.


2212 2212 2122

सनसनी....

अब तो यहाँ इस बात की सनसनी है

हाथों में पत्थर, और जान पे बनी है

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हमने तराशा हीरे की शक्ल-सूरत

लिपटी वहीं पे तरबतर चाशनी है

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सरकार हैं क्यूँ आग बबुला से मेरे

दब कौन सी नस गई, चढ़ी झुंझुनी है

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खामोश हो जीने का मकसद यहाँ क्या

आसार बारिश ,मेघ परतें घनी है

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ये फैसलों क़े बाल सारे हैं सफेद

राहत यहां कमजोर सी संगनी है

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तुम हो कहां सब आजमाने लगे हैं

उम्मीद की हर किरण अब अनमनी है

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रहबर मिले तो मंजिले खूब आसान

वरना तो खुल्ले आम अब रहजनी है

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सुशील यादव

न्यू आदर्श नगर,जोन 1 स्ट्रीट 3 A

दुर्ग छत्तीसगढ़


मोबाईल :7000226712


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