तू मेरे राह नहीं
जाने के साथ मेरे, पतझर चला
जाएगा
ख़ामोशी का
आलम, मंज़र चला
जाएगा
नासमझी के
और न, फेंको
पत्थर इधर-उधर
छुट के
तेरे हाथ कभी गुहर चला जाएगा
माँग
अंगूठे की करते समय न सोचा होगा
एक ग़रीब
का सरमाया , हुनर चला
जाएगा
मेरे हक़
में ये कौन, गवाही
देने आया
सुन के
ज़माने की बातें, मुकर चला
जाएगा
रौनक़
महफ़िल की देख न ठहरा जाए हमसे
सदमों में
ये दिल आप उठ कर चला जाएगा
शायद मै
सीख लूँ, जीना तेरे
बग़ैर सुशील
तू मेरे
राह नहीं कि, मुड़कर चला
जाएगा
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