Friday, 12 May 2023

 

देख दुनिया . . . 

सुशील यादव(अंक: 206, जून प्रथम, 2022 में प्रकाशित)

2122     2122     2122
 

नेक नीयत आप यूँ सुल्तान हो गए
हर किताबी हर्फ़ अब आसान हो गए
 
हम शिकायत कर नहीं पाते वहाँ पर
आजकल बच्चे जहाँ तूफ़ान हो गए
 
देख दुनियाँ बैठ जाते हम किनारे
क़ीमतें छूते हुए असमान हो गए
 
राहतों का ये ज़ख़ीरा जो लिए तुम
सादगी के ईश्तहारो-बखान हो गए
 
डर के जीना आ नहीं पाया कभी मगर
क़ौम ज़िन्दा के बचे हम निशान हो गए

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