Friday, 12 May 2023

 

दर्द का दर्द से जब रिश्ता बना लेता हूँ

सुशील यादव(अंक: 205, मई द्वितीय, 2022 में प्रकाशित)

2122   1222   2122   22

 
दर्द का दर्द से जब रिश्ता बना लेता हूँ
इस बहाने सभी को अपना बना लेता हूँ
 
ख़ास कुछ हैं मुकर जाते बात से अपनी
आदमी मान के अलग रास्ता बना लेता हूँ
 
मज़हबी दौड़ में जा के मुल्क क्या हासिल करे
ख़ौफ़ में अब धमाका ज़्यादा बना लेता हूँ
 
धूप में ढूँढ़ता मैं साया किसी बरगद का
छाँव क़ोई क़सीदा मन का बना लेता हूँ
 
फूल से है मुझे रंज ख़ुश्बुओं से परहेज़
याद में बारहा क्यूँ बग़ीचा बना लेता हूँ
 
बहलता अब नहीं आपे से ज़माना बाहर
ख़ुश वहाँ हो सकूँ घरोबा बना लेता हूँ

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