तेरी दुनिया नई नई है क्या
२१२२ १२१२ २२
तेरी
दुनिया नई नई है क्या
रात रोके
कभी, रुकी है
क्या
बदलते
रहते हो, मिज़ाज
अपने
सुधर जाने
से, दुश्मनी
है क्या
जादु-टोना
कभी-कभी चलता
सोच हरदम,यों चौंकती है क्या
तीरगी, तीर ही चला लेते
पास कहने
को, रोशनी है
क्या
सर्द मौसम, अभी-अभी गुज़रा
बर्फ़
दुरुस्त कहीं जमी है क्या
No comments:
Post a Comment