Friday, 12 May 2023

 

तन्हा हुआ सुशील .....

सुशील यादव

ज़िन्दगी को आम आदमी, के मद्देनज़र देखिये
रख के कभी तो भारी सा, सीने पत्थर देखिये

तिनका-तिनका बिखर जाता, है महल कैसे-कैसे
तख़्तो-ताज उतरा, रातों-रात किस क़दर देखिये

यकायक महफ़िल में, मेरी, सदा ख़ामोश हो गई
कहाँ-कहाँ टूटा, झाँक के, मुझको अन्दर देखिये

हाथ की लकीर में वो लिख, देता जो तक़दीर भी
एक अरसे मगर चला नहीं, सच का अजगर देखिये

कितना तन्हा हुआ 'सुशील', एक तेरे न होने से
कभी सुध हमारी लीजिये, कभी पलटकर देखिये

No comments:

Post a Comment