Saturday, 13 May 2023

 

मुफ़्त चंदन

सुशील यादव(अंक: 214, अक्टूबर प्रथम, 2022 में प्रकाशित)

2122     1222     2

 

कल जिसे तू मिला है भाई
दूध का वही धुला है भाई
 
आदमी चाहे जो अपनापन 
ख़ैरियत से मिला है भाई
 
हिन्दु मुस्लिम संग रहते हों 
पास कोई ज़िला है भाई
 
फूल कितने बिछाए रखते 
तेरा काँटा गिला है भाई 
 
बो रखे हैं बबूल हज़ारों
फूल कह दो खिला है भाई
 
राग कैसे अलापे जीवन
ये गला तो छिला है भाई
 
मुफ़्त चंदन घिसा जो करते
दिल मेरा वो सिला है भाई

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