Thursday, 15 September 2022

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फ़िलबदीह - 1104🌺

221 2122 221 2122

हम जगह-जगह, दुनिया भटके गुमान लेकर

कोई जरूर आएगा नव-विहान लेकर


कुछ दाग जहन में बाकी है, जिसे मिटाने

जख्मो सहित निकल भी दौड़ो, निशान लेकर


इतराये जो पड़ौसी उसको तमीज दे-दो

आदत सुधार लें वो अमिट पहचान लेकर

 

मजबूत हैं इरादे तो बात ही नहीं है

वरना चले-चलोगे कैसे थकान लेकर


कोशिश करे सभी जन ,ऊंचा ललाट पाये

गौरव पलों में घूमे सब , हिन्दुस्तान  लेकर

सुशील यादव

१३.६.१८


मसखरी  युग


निगाहें हटा के ज़माना चला है

गरीबो यही तो बहाना चला है


बताओ कि है आदमी का वजूद क्या

घिरा आप ही खुद निशाना चला है


बचा के रखें क्या विरासत की खातिर

कगार आजतक  आब-दाना चला है

 

मुकदमो में जीतें कि हारें बराबर

घड़ी-फैसला मुंसिफ-थाना चला है


हमे गुदगुदा के छिपा कौन बोलो

कहीं  मसखरी युग  पुराना चला है

सुशील यादव

१३६१८

$$



वो कुछ दिनों से ....

२२१२    २२१२  2२1२  1२

अपनी जुबा से, बात मन की  खोलता नहीं

वो कुछ दिनों से, आजकल फिर बोलता नहीं


खामोशियाँ उसकी, इशारा क्या करे बता

टूटे परो से, आसमा जो  तौलता नहीं


दिल टूटने की हर अदा में सादगी रखे

पी ले ज़हर चुपचाप, ज़हर वो घोलता नहीं


पानी सा हो, उस खून का, क्या करता वो भला

घिर के मुसीबत- आफतो में खौलता नहीं


सुशील यादव


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हम वहम की दुनिया भटके गुमान लेकर

कोई जरूर आएगा नया विहान लेकर



किरीट सवैया नामक छंद आठ भगणों से बनता है।

इसमें 12, 12 वर्णों पर यती होती है।


तीरथ जाकर लौट गया वह,बीन रहा अब चांवल कंकर

जो मन में प्रभु वास रहे तब ,छीन सका उर से कब शंकर


महाभुजंगप्रयात आठ सगण| :सुशील यादव

यहां तो न बाकी रहा चाहतो का, इलाका जिसे  याद  तूने किया है

न आबाद है वो जमीने जहां तू ,उगा बालियां खेत में जी लिया है


बचा कोहरा-धूल-माटी निहारो ,जिसे चाहते हो उसे ही  पुकारो

सभी तो कहीं जा चुके हैं यहां से ,तु बीमार कैसे जिया है

 

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