Thursday, 15 September 2022

 सरसी छंद में परिवर्तित दोहे 2

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हमको सिखा गए हैं जाते ,ये गोरे अंग्रेज।

खूब करो सरहद रखवाली  , रख तलवारें तेज ।।

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आप कभी हिम्मत ना हारें,  साहस ना दें छोड़ ।

बात भला क्या एक करोना  , जग में रोग करोड़ ।।

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कर गया हाथ हजार वाला,उल्टे सीधे काम ।

मुंह ढाप के अब है सोना ,दर्शन दुर्लभ राम ।।

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यहां भला हो किसे शिकायत  ,कोई क्यूं नाराज। 

है नगरी सारी  माया की।  ,सब के सर में ताज ।।

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 संभावना बढ़ती बारिश की, बाढ़ नदी संकेत।

देखूं तुझको किसान बैठा ,कौन देखता खेत।।

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दांवपेंच सब है कानूनी , फसलों को आघात।

घिसता  किसान अपनी जूती ,पागल के अनुपात ।।

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 मारा हुआ वक्त के हाथो ,ये बचा बदनसीब।

है जिंदगी लाचार वंचित ,गिनती बढ़ा गरीब ।।

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सुशील यादव


जाते हुए सिखा गए,ये गोरे अंग्रेज।

रखवाली सरहद करो, रख तलवारें तेज ।।

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हिम्मत कभी न हारिए,  साहस भी मत छोड़ ।

एक करोना बात क्या, जग में रोग करोड़ ।।

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हाथो हजार कर गया,उल्टे सीधे काम ।

मुंह ढाप  सोया अभी,दर्शन दुर्लभ राम ।।

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किसे शिकायत हो भला ,कोई क्यूं नाराज। 

माया नगरी खेल में,सब के सर में ताज ।।

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बारिश की संभावना, बाढ़ नदी संकेत।

तू किसान बैठा यहां,कौन देखता खेत।।

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दांवपेंच कानून के , फसलों को आघात।

घिसता किसान जूतियां ,पागल के अनुपात ।।

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हाथ वक्त मारा हुआ ,ये बचा बदनसीब।

वंचित है लाचार है ,गिनती बढ़ा गरीब ।।

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सुशील यादव 

न्यू आदर्श नगर स्ट्रीट 3 जोन 1

 दुर्ग छत्तीसगढ़


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