Thursday, 15 September 2022

चौपाई

 चौपाई :बरसात में ....


पानी-पानी, आया पानी |

 गर्मी दूर भगाया पानी ||

सबने खूब निकाले छाते |

 रंग-बिरंगे, काले छाते ||


सुख की गिनती कौन करेगा,

अब जो भीतर भीग डरेगा | 

यूँ ना देखी  होगी बारिश ,

सहमी-विनती और गुजारिश |


लो कृषको का मन हर्षाया,

मेघ-घटा, उमड़- घुमड़ आया |  

हल लेकर ये  खेतों निकले,

मिटटी कोना- सोना पिघले |


हो जाती हर शाम-सुहानी,

देखो छेड़  अतीत कहानी |

बचपन की नावों का मिटना ,

भीगे-भीगे  आकर  पिटना | 


बारिश पानी बहता जाता ,

सूखा-नाला भी उफनाता |

किन्तु हमी-हम  ठहरे होते ,

नम रिश्ते भी गहरे होते |


सुशील यादव दुर्ग

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