Tuesday, 27 September 2022

कातिलों के chehre

 

कातिलो के चेहरे ....
खून के छींटे पड़े ,पत्थर  में अब
कातिलो के चेहरे हैं खबर में अब
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कठिन था वो दौर जुल्मो-सितम का
फैलती अफवाह ये  बंजर में अब
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कल  लुटेरा बन के लूटा गजनवी
तुमने पहचाना उसे रहबर में अब
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याद हमको हैं खरोचें भी जरा
लोग रहते आग-झुलसे शहर में अब
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फैसलों की ये घड़ी शायद  नहीं
जीत कर जीते जी क्यूँ कबर में अब
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मेरी पेशानी में है यायावरी
कुछ नफा दिखने लगा दरबदर में अब
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सुशील यादव

चिंतन....

आस्था के अंगद अड़े हैं भाई
हम अर्जी लिए खडे है भाई

मनमानी से तुम बाज न आते
माना कद में तुमसे बड़े हैं भाई

बेईमानी से चाहे पुल बना लो
रिश्ते तो खंबो  में गड़े हैं भाई

लूटने वाले सब दल में आते
पकड़े गए सभी छड़े है भाई

क़ानून को जिसने हाथ लिया
हाँ जेल में वो ही सड़े है भाई

राजनीति में क्या उसूल ढूंढते
तस्वीर पुरानी पकड़े हैं भाई

व्यर्थ पानी को इनमें खर्चना
कहते ये चिकने घड़े हैं भाई

सुशील यादव न्यू आदर्श नगर दुर्ग
मो.7000226712

तेरे प्यार अलावा
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ये कैसी नइय्या?
कैसा खेवनहार मिला है

सब्र की फसल कहाँ उगाएं
काटें क्या इन खेतो से?
धीरज की मिट्टी में बाक़ी
क्या रहा सिवा रेतों के

रिश्तो को जितना हमने सींचा
उतना ही खर -पतवार मिला हैं
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हम सूरज से रहे मुकाबिल
समुद्र लहर - लहर टकराये
लेकिन तुमसे मिलने केवल
तुफानी चेहरा छोड़ के आए

वादों की बस्ती में  बतलाएं
जहाँ गए तकरार मिला हैं
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आज हमारी हरकत पर
नजर टिकी है जमाने की
तेरे प्यार अलावा क़ोई
चाबी नहीं खजाने की

निज़ाम में हासिल जगह नहीं
चार तरफ मातम अंगार मिला हैं
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सुशील यादव न्यू आदर्श नगर दुर्ग

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