Thursday, 15 September 2022

 लोग  सम्हलने नहीं देते

1222 1222     1222     1222

हमारी नजर में लोग हमे सम्हलने नहीं देते 

यहां माकूल सा माहौल तो बदलने नहीं देते 


न जाने लौट आता सोच क्या,दिल का बसन्त यहाँ 

तेरी रहगुजर होकर, कुछ हैं , बस  निकलने नहीं देते 


न कायदा है न कानूनी फिकर देखो जिसे आजकल 

हुकूमत के उसूलो से हमे बाख़बर हो चलने नहीं देते 


तलब होती, तेरे दीदार की मायूसियों में जब 

बचा के नजर सैलाब आंख में  उतरने नहीं देते


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