Thursday, 15 September 2022

 चार दिन जिनगी चहक लेते तैं

चार खुट बनठन चमक लेते तैं


लकर धकर  बोय तें संसो पताल

गोंदा बने बोते महक लेते तैं


करम के बोरे बासी हे सिटठा

नुनछुर करे नून -नमक लेते तैं


लुकाए  बीज़हा ,  किरहा घुनहा

सुरता के सुपा फाटक लेते तैं


किसान बर दू अकाल परे भारी

करम  होतीस मेचका छपक लेते तैं


बईहा संग कती तइहा रेगा गे

अंगना म सियान फफक लेते तैं


राख़ माटी सिरा जाबे कहू दिन

थोरकिन थिरा भभक लेते तैं


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सुशील यादव ::7000226712







कतेक हमर अघाना जी

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कतका हमला खाय बर मिलथे,

कतेक हमर अघाना जी

हकन के काम करइया हमन   ,

नइ जानेन कोनो  बहाना जी

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तुहरे बोली- बानी तुहरे ,

तुहरे झंडा-डंडा होवन

तुहर तरक्की नार चढ़े,

 बीजा वहू हमी-मन बोवन

हमर कन्धा  रखेव चलाएव,तुमन अपन निशाना जी

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हमर खेती तें अधिया मालिक ,

हमर छाती मूंग दलईय्या

तुमन नँगा-नँगा ले जाथव,

हमर भाग के पानी -पसिया

धोवन जइसन होगेन हम,काखर संग पारन हाना जी

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हमर भाग के नाप-जोख म,

तुमला सबो घुरवा लगथे

तुंहर नीयत-सफेदी हमला ,

काबर करिया- भुरवा लगथे

बात -बुलेट बइठा देव हमला  ,छुटिस हमर ठिकाना जी

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सुशील यादव

न्यू आदर्श नगर दुर्ग

21.4.19

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