मौसम....
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मेरे चाहने से कब बदला है मौसम
तेरे कहने पे जो चलता है मौसम
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घुटने - घुटने पानी जब नावें चलती
ठहरा - ठहरा तब तो लगता है मौसम
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नदिया बीच भंवर मेँ फँस कर ये जाना
खुद भी कैसे रह लेता तन्हा मौसम
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एक दूजे की करते पूछ परख तब तक
तिरपाल तले हो कुनबा सूखा मौसम
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सालों बाद भटकते आया है जाने
कुछ तिलस्मी, फिल्मी कुछ गोया मौसम
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सुशील यादव
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