आजकल जाने क्यों.....
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एक गलत सोच, आखों की स्याही बदल देता है
समूचे शहर को बारूदी , तबाही बदल देता है
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फर्क पड़ता नहीं तुम्हारे ऐशो- आराम में तनिक
आंकड़ो की मुनादी ही बस गवाही बदल देता है
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रिश्तों को निभाना इतना नहीं आसान आपस में
जुबान की जरा तलखी आवाजाही बदल देता है
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मजबूरी ये कि हम बदल नहीं सकते खुद पडोसी
सामने का मुल्क बातों की कड़ाही बदल देता है
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छीन कर ले जाता था कोई मेरा चैन -करार वही
आजकल जाने क्यों तरीका उगाही बदल देता है
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सुशील यादव
न्यू आदर्श नगर,जोन 1 स्ट्रीट 3 A
दुर्ग छत्तीसगढ़
मोबाईल :7000226712
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