2122 2122 1222
वो जो मोहब्बत की तकदीर लिखता है
किसी-किसी के हाथ जागीर लिखता है
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कोई चाहे कुछ गरम कोई ठंडा यूं
मांग के माफ़िक वो तासीर लिखता है
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साथ चलते भाँप लेते हवा का रुख
नाम उनके वक़्त ही समीर लिखता है
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हो जिसे अँधेरे का खौफ जीवन भर
बस खुदा ही समझ तनवीर लिखता है
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हम रहें जिसे पाने आवेग से आतुर
ये जमाना अब हमें अधीर लिखता है
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दर्द के हर कोण की नाप ले जीता
वो ख़लाओ तेरी तस्वीर लिखता है
सुशील यादव
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