Thursday, 15 September 2022

 

२*८ दुनिया रंग-बिरंगी

दुनिया रंग-बिरंगी देखो
फिर से चाल फिरंगी देखो
हम हैं अपने सूबे में खुश
बारा- मासी तंगी देखो
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आज यही केवल सच्चाई
है भाई का नाम कसाई
हम ख़र्चे हैं आना जिस पे
वो छोड़े न हिसाबी पाई
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हम पर आग बबूला होते
हम क्या सावन झूला होते
मौसम की है मार सभी को
सब को परखो सब से सीखो
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पीतल को समझा था सोना
मिटटी को था मिटटी होना
लाख सजा लो घर को चाहे
प्यार बिना चमके कब कोना

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१५.६.१८

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