दीवार साझा....
है कौन जो तन्हाई मेँ सदा देगा
बन के सबा मुझको जरा हिला देगा
Q
क़ोई सुने ये तल्ख़ सी हकीकत को
किस जुल्म की मुनसिफ़ मुझे सजा देगा
Q
तुम जो रहो गर उम्र भर करीब मेरे
दिनरात चुटकी मेँ समय बिता देगा
Q
हिलती हुई परछाई से रखो दूरी
बेमौत कब दीवार यहीं टंगा देगा
Q
जिस राह पर होती रही मुलाकातें
पहरा क़ोई उस मोड़ पर बिठा देगा
Q
गुमनाम अँधेरे से हम निकल आये
हालात जीना,भी हमें सिखा देगा
Q
अंजान सा बैठा छिपा हुआ नासूर
कब हरकतों आकर कहीं डरा देगा
Q
मत सोचना, नक्शे कदम मेरे चलना
ले जा बियाबान एक दिन गिरा देगा
Q
तेरी तलब है हमको मगर करें तो क्या
बस तंज ही काफी इसे डुबा देगा
Q
मजबूरियां है या समय फरेबी सा
दीवार साझा बीच कल उठा देगा
Q
टीकमगढ़ 11.7.22
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