Thursday, 15 September 2022

 दीवार साझा....


है कौन जो तन्हाई मेँ सदा देगा 

बन के सबा मुझको जरा हिला देगा

Q

 क़ोई सुने ये तल्ख़ सी हकीकत को

किस जुल्म की मुनसिफ़ मुझे सजा देगा

Q

तुम जो रहो गर उम्र भर करीब मेरे 

दिनरात चुटकी मेँ समय बिता देगा 

Q


हिलती हुई परछाई से रखो दूरी 

बेमौत कब दीवार यहीं टंगा  देगा

Q

जिस राह पर होती रही मुलाकातें 

पहरा क़ोई उस मोड़ पर बिठा देगा 

Q

गुमनाम अँधेरे से हम निकल  आये

हालात जीना,भी हमें सिखा देगा

Q

अंजान सा बैठा छिपा हुआ नासूर

कब हरकतों आकर कहीं डरा देगा

Q

मत सोचना, नक्शे कदम  मेरे चलना

ले जा बियाबान एक दिन गिरा देगा 

Q

तेरी तलब है हमको मगर करें तो क्या

बस तंज ही काफी इसे डुबा देगा 

Q

मजबूरियां है या समय फरेबी  सा 

दीवार साझा बीच कल उठा देगा 

Q

टीकमगढ़ 11.7.22

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