Thursday, 15 September 2022

वादों की रस्सी

 

वादों की रस्सी मे तनाव आ गया है
मंदिर के चर्चे हैं चुनाव आ गया है

गुस्ताख स्वागत  माफ करना हुजूर
चेहरे पे मसलन खिचाव आ गया है

रोगग्रस्त थी उफ ये नदी पांच साल से
अब की बारिश कैसा बहाव आ गया है

ये लोग उठाने से कतरा रहे परचम
इरादों मे इनके  बदलाव आ गया है

खबर हमें भी थी कोई लहर उठेगी
समुन्दर के रस्ते कटाव आ गया है

लादेन जा रहा था अपने पैरो चल के
पुतिन जो मिला ठहराव आ गया है
😁
हुकूमत की ऐसी लग गई है आदत
सच लगे बेचने कि भाव आ गया है
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