2221 2221 2221 212
छोटी उम्र में ...
जाकर दूर, वापस लौटना, अच्छा नहीं लगा
रिश्तों को, अचानक तोड़ना,अच्छा नहीं लगा
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मातम भी जताने लोग अब इस तरह आ रहे
रस्मों को तराजू-तौलना अच्छा नहीं लगा
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काबिल हो अभी माफी के दीगर बात साहबान
बारिश में जी भर के खौलना अच्छा नहीं लगा
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तुम सम्हाल लो सल्तनत ये बेखौफ आजकल
कल तो और का है बोलना, अच्छा नहीं लगा
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गम के दौर में कब चलन से बाहर हुआ 'सुशील'
रातो मोम बन के पिघलना अच्छा नहीं लगा
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लाखों तक रटी गिनती, करोड़ कभी सुने कहाँ
छोटी उम्र ज्यादा बोलना , अच्छा नहीं लगा
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अपनी हैसियत अनुसार हम रहते यहाँ कहां
मन का ठोकरों से बहलना अच्छा नहीं लगा
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सुशील यादव
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