खोज जारी है ...
अब दुश्मन जाने पहचाने हैं
यारो हम भी बहुत सयाने हैं
है आज-जुदा फिर राम-कहानी
समझौतों के स्याह निशाने हैं
मुस्कान पकड़ में कम आती है
गम के चौतरफा अफसाने हैं
परिचय अपना, मैं तुमको क्या दूँ
चर्चित तो नाकाम बहाने हैं
सबने जी भर तौला-परखा मुझको
गुजरे - बीते इतिहास पुराने हैं
दिल भीतर खोज अभी है जारी
दाल अभी तो बहुत गलाने हैं
सुशील यादव
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