धोये से फिर ना धुले ,
##
इस राग को कहाँ अलापे
मिले ज़ख्म कहाँ सहलाएं
जीवन के कोलाहल मे
शांति गीत अब कैसे गायें
@
मन परिंदे कहाँ उड़े
जीवन आपा-धापी में
खोज न पाये दो ढाई अक्षर
किसी किताब कॉपी में
##
दाने-दाने मुहताज रहे
खाने के जब दिन थे अपने
अब दानों को फेक रहे
पाकर ऊँचे बेहतर सपने
##
संशय में पहचान न पाये
होली के हम गडमड चेहरे
कितने साफ रखे थे दर्पण
हालांकि कुछ दाग थे गहरे
##
दिशाहीन सा कोई भटका
दिक -भ्रमित हुआ है क़ोई
तेरे रचे माया जाल को
जाकर नजदीक छुआ है क़ोई
@
अब संशय हर संबोधन मे
हर परिचय अंगार भरा है
आहत है रिश्तों का आँगन
पिछले चोट का घाव हरा है
@
कैसे तुझको परखें तौलें
कितना तुझपे विश्वास करें
मनमानी जो आप करो तो
किसके आगे प्रलाप करें
@
##धोये से फिर ना धुले ,
##
इस राग को कहाँ अलापे
मिले ज़ख्म कहाँ सहलाएं
जीवन के कोलाहल मे
शांति गीत अब कैसे गायें
@
मन परिंदे कहाँ उड़े हैं
जीवन आपा-धापी में
खोज न पाये दो ढाई अक्षर
किसी किताब कॉपी में
##
दाने-दाने मुहताज रहे
खाने के जब दिन थे अपने
अब दानों को फेक रहे
पाकर ऊँचे बेहतर सपने
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संशय में पहचान न पाये
होली के हम गडमड चेहरे
कितने साफ रखे थे दर्पण
हालांकि कुछ दाग थे गहरे
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दिशाहीन सा कोई भटका
दिक -भ्रमित हुआ है क़ोई
तेरे रचे माया जाल को
जाकर नजदीक छुआ है क़ोई
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अब संशय हर संबोधन मे
हर परिचय अंगार भरा है
आहत है रिश्तों का आँगन
पिछले चोट का घाव हरा है
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कैसे तुझको परखें तौलें
कितना तुझपे विश्वास करें
मनमानी जो आप करो तो
किसके आगे प्रलाप करें
@
जो वसन हम पहना करते
चरखा हमी चलाने वाले
बूढ़े हाथ बता तुम कंपन
इतिहास में रहते छाने वाले
@
सौ -सौ साल अगर हम चाहें
नीयत साफ तो पा न सकेंगे
धोये से जो ना धुले पाप वो
पीढ़ी को कल बतला न सकेंगे
@#
सुशील यादव
न्यू आदर्श नगर,जोन 1 स्ट्रीट 3 A
दुर्ग छत्तीसगढ़
7000226712
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