Thursday, 15 September 2022

धोये से

 

धोये से फिर ना धुले ,

##
इस राग को कहाँ अलापे
मिले ज़ख्म कहाँ सहलाएं
जीवन के कोलाहल मे
शांति गीत अब कैसे गायें
@
मन परिंदे कहाँ उड़े
जीवन आपा-धापी में
खोज न पाये दो ढाई अक्षर
किसी किताब कॉपी में
##
दाने-दाने मुहताज रहे
खाने के जब दिन थे अपने
अब  दानों को फेक रहे
पाकर ऊँचे बेहतर सपने
##
संशय में पहचान न पाये
होली के हम गडमड चेहरे
कितने साफ रखे थे दर्पण
हालांकि कुछ दाग थे गहरे
##
दिशाहीन सा कोई भटका
दिक -भ्रमित हुआ है क़ोई
तेरे रचे माया जाल को
जाकर नजदीक छुआ है क़ोई
@
अब संशय  हर संबोधन मे
हर परिचय अंगार भरा है
आहत है रिश्तों का आँगन
पिछले चोट का घाव हरा है
@
कैसे तुझको परखें तौलें
कितना तुझपे विश्वास  करें
मनमानी जो आप करो तो
किसके आगे प्रलाप करें
@

##धोये से फिर ना धुले ,

##

इस राग को कहाँ अलापे

मिले ज़ख्म कहाँ सहलाएं

जीवन के कोलाहल मे

शांति गीत अब कैसे गायें

@

मन परिंदे कहाँ उड़े हैं 

जीवन आपा-धापी में

खोज न पाये दो ढाई अक्षर

किसी किताब कॉपी में

##

दाने-दाने मुहताज रहे

खाने के जब दिन थे अपने

अब  दानों को फेक रहे

पाकर ऊँचे बेहतर सपने

##

संशय में पहचान न पाये

होली के हम गडमड चेहरे

कितने साफ रखे थे दर्पण

हालांकि कुछ दाग थे गहरे

##

दिशाहीन सा कोई भटका

दिक -भ्रमित हुआ है क़ोई

तेरे रचे माया जाल को

जाकर नजदीक छुआ है क़ोई

@

अब संशय  हर संबोधन मे

हर परिचय अंगार भरा है

आहत है रिश्तों का आँगन

पिछले चोट का घाव हरा है

@

कैसे तुझको परखें तौलें

कितना तुझपे विश्वास  करें

मनमानी जो आप करो तो

किसके आगे प्रलाप करें

@

जो वसन हम पहना करते

चरखा हमी चलाने वाले

बूढ़े हाथ बता तुम कंपन

इतिहास में रहते छाने वाले

@

सौ -सौ साल अगर हम चाहें

नीयत साफ तो पा न सकेंगे

धोये से जो ना धुले पाप वो

पीढ़ी को कल बतला न सकेंगे

@#

सुशील यादव

न्यू आदर्श नगर,जोन 1 स्ट्रीट 3 A

 दुर्ग छत्तीसगढ़

7000226712

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